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एनजीटी की सख्ती के बाद भी प्रशासन नहीं आया हरकत में

Thu, 08 Jul 2021 12:30 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 08 Jul 2021 12:30 AM IST
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Even after the strictness of NGT, the administration did not come into action
एनजीटी की सख्ती के बाद भी स्थानीय प्रशासन ने असि नदी को पुनर्जीवित करने के लिए प्रयास नहीं शुरू किए हैं। नाले में तब्दील हो चुकी असि का अस्तित्व तो पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने वरुणा और असि के पुनरुद्धार के बिना गंगा सफाई को असंभव बताया है। इसके तहत एनजीटी ने समिति का गठन करके गंगा, वरुणा और असि में प्रदूषण, अवैध अतिक्रमण की रिपोर्ट तलब की है।
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असि नदी के दोनों ओर 25-25 मीटर की हरित पट्टी वीडीए के 2031 के महायोजना में दर्शाई गई है। वहीं राजस्व विभाग के रिकार्ड में यह नदी नाले के रूप में भले ही दर्ज हैं, लेकिन काफी चौड़ी दर्शाई गई है जबकि मौके पर इसका वह स्वरूप नहीं दिखता है, जो राजस्व नक्शे में है। पौराणिक महत्व वाले असि नदी के पुनरुद्धार के लिए डीएम कौशल राज शर्मा ने चार विभागों की कमेटी बनाई थी। विभाग को सर्वे करके अपनी रिपोर्ट देनी थी और उसके बाद विकास प्राधिकरण द्वारा सरकारी जमीनों पर बने अवैध भवनों को ध्वस्त किया जाना था।
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वहीं नदी किनारे ग्रीन बेल्ट में बने अवैध भवनों का भी चिन्हांकन करके उस पर वैधानिक कार्रवाई की जानी थी लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई काम नहीं हो सका है। वीडीए प्रशासन ने असि नदी व उसकी तलहटी में बने भवनों के सर्वे के लिए दो जोनल अधिकारियों की तैनाती की थी। जोनल अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्र से करीब सौ-सौ भवनों को चिह्नित भी किया था।
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