बिजली निगम में 6 करोड़ के गबन का मामला: MD के दस्तखत से पहले एडिट कर देता था आंकड़े, CA रह चुका है आरोपी
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में छह करोड़ के गबन का आरोपी सीए रह चुका है। उसने कई बैंकों में छह से सात खाते खुलवा रखे थे। अफसरों को और वित्तीय गड़बड़ियों की आशंका सता रही
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छह करोड़ के गबन का आरोपी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का लेखाकार केशवेंद्र द्विवेदी फाइलों के साथ अंतिम समय में गणितीय खेल करता था। पता चला है कि वह फाइल तैयार होने के बाद अप्रूवल के लिए आखिर में दस्तखत के लिए एमडी के पास जाने से पूर्व आंकड़ों और अकाउंट को एडिट कर देता था।
आरोपी लेखाकार बिजली निगम में नियुक्त होने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट था। उसने एचडीएफसी, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईसीआईसीआई, पीएनबी, इंडियन बैंक समेत कई बैंकों में छह से सात बचत खाते खुलवा रखे थे। विभागीय सूत्र बताते हैं कि वित्तीय गड़बड़ी के लिए उसने तरकीब निकाली थी।
भुगतान की पूरी फाइल तैयार होने के बाद आखिरी एप्रूवल के लिए जब वह एमडी के पास जाता था तो आशंका है कि उससे ठीक पहले वह फाइलों में एडिट कर देता था। चूंकि वह पहले से सीए रहा है, इसलिए अधिकारियों को आशंका है कि उसने कई और गड़बड़ियां न की हों। इस दृष्टिकोण से भी विभागीय जांच की जा रही है।
पूर्वांचल डिस्कॉम ने रिकवर किए 3.3 करोड़
लेखाकार ने लगभग तीन करोड़ रुपये अपने अमरा खैराचक स्थित इंडियन बैंक के अकाउंट में रखे था। पूर्वांचल डिस्कॉम के निदेशक वित्त संतोष जाड़िया के मुताबिक आरोपी से दो बार में (2.9 करोड़ और 90 लाख मिलाकर) 3.3 करोड़ रुपये रिकवर करते हुए पूर्वांचल डिस्कॉम के अर्दली बाजार स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में जमा करा दिए हैं। इससे पूर्व आरोपी लेखाकार 10 लाख रुपये डिस्कॉम को लौटा चुका है। इस तरह 3.13 करोड़ रुपये की रिकवरी के बाद बची रकम के लिए उसकी तलाश की जा रही है।
निलंबित लेखाकार की विभाग तैयार कर रहा चार्जशीट
करोड़ों के गबन के आरोपी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के लेखाकार ने दो ट्रांजेक्शन में ही लगभग तीन करोड़ रुपये अपने खाते में सरका दिए थे। इसके इनपुट मिलने के बाद डिस्कॉम ने उसकी 360 डिग्री विभागीय जांच शुरू करा दी है। आरोपी अकाउंटेंट को निलंबित कर उसके पटल से अब तक किए कार्यों और फाइलों की जांच की जा रही है। संभावना है कि अकाउंटेंट की ओर से गबन की गई रकम का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
कार्यदायी संस्था एनसीसी लिमिटेड के एक बार में 1.98 करोड़ और दूसरी बार 90 लाख रुपये उसने एक अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर लिए थे। गड़बड़ी की विभागीय पत्रावली सामने आने के बाद पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी शंभू कुमार ने उसे निलंबित कर दिया।
निदेशक कार्मिक और प्रबंधन आरके जैन ने कहा कि प्रकरण की विभागीय जांच कर आरोप पत्र तैयार किया जा रहा है। सारे तथ्य सामने आने के बाद उस हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर पूर्वांचल डिस्कॉम में भ्रष्टाचार के एक के बाद एक तीसरा मामला आने के बाद हड़कंप मचा है।
पता चला है कि आरोपी की प्रयागराज के पॉश इलाके में करोड़ों की बिल्डिंग है। इससे लाखों रुपये किराया आता है। लेखा विभाग के उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से भी मामले में इंकार नहीं किया जा सकता है।