अकीदत के साथ लोगों ने घरों में अदा की ईद की नमाज, सोशल डिस्टेंस का किया पालन
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कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने लिए लगाए गए लॉकडाउन ने लोगों की पूरी जिंदगी को बदल दिया है। कोरोना का संक्रमण न हो इसके लिए सोशल डिस्टेंस बनाए रखना बहुत जरूरी है। लॉकडाउन की वजह धार्मिक त्योहार भी लोग अब घर पर ही मना रहे हैं। होली, नवरात्र के बाद अब ईद का पर्व भी लोग सोशल डिस्टेंस के साथ मना रहे हैं।
पूर्वांचल में वाराणसी समेत आसपास के जिलों में लोगों ने घर पर ईद की नमाज अदा की। कोरोना वायरस को लेकर ईदगाह और मस्जिदों में इस बार नमाज अदा करने की इजाजत नहीं है। इस दौरान इन जगहों पर पुलिस बल भी तैनात किया गया है। साथ ही प्रशासन भी अलर्ट है।
वाराणसी में लंगड़ा हाफिज मस्जिद में सिर्फ पांच लोगों ने नमाज पढ़ी। जहां मस्जिद के इमाम जकीउल्ला असद्दुल कादरी ने नमाज पढ़ाई। वहीं पूर्वांचल जिलों की मस्जिदों और ईदगाह में सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए चार-पांच लोगों ने ही नमाज अदा की है। सभी लोग 'घर पर रहो, सुरक्षित रहो' को अपनाकर कर घरों में ईद की नमाज अदा की है। हालांकि प्रशासन अपने तरफ से अलर्ट था।
घरों में ईद की नमाज अदा करने के बाद लोग मोबाइल और व्हाट्सएप के जरिए एक-दूसरे को ईद की बधाइयां दे रहे हैं। ईद के मौके पर मऊ जिले में जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीणांचल तक 300 से अधिक ईदगाहों और मस्जिदों में नमाज अदा की जाती है, अकेले शहर में औरंगाबाद ईदगाह सहित 132 मस्जिदों में ईद की नमाज अदा होती है। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते अकीदतमंदों ने मस्जिदों की बजाए घरों में ईद की नमाज अदा की।
पहाड़पुरा अरशद मौलवी ने बताया कि सोशल डिस्टेंसिग को ध्यान में रखकर मस्जिदों में रमजान भर 5 लोग नमाज अदा करने जा रहे थे। आज वही पांच लोग ईद की नमाज मस्जिदों में अदा की। मऊ के अपर पुलिस अधीक्षक एसके श्रीवास्तव ने बताया, जो ऊपर से आदेश होगा उसका पालन कराया जाएगा। रही बात मस्जिद में नमाज अदा करने की तो ऊपर वाला भी कहता है कि हर उस काम को न करे, जिससे कानून व्यवस्था प्रभावित हो।