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‘एहि ठइयां मोतिया हेराइल हो रामा...’
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 12 Sep 2016 02:13 AM IST
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काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन सभागार में रविवार की शाम आयोजित कार्यक्रम में युवा कलाकारों ने विलुप्त हो रही गायन शैली चैती की प्रस्तुति कर दर्शकों की तालियां बटोरीं। ‘एहि ठइयां मोतिया हेराइल हो रामा...’ गीत के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां हुईं।
संस्कृति मंत्रालय की ओर से ‘धरोहर’ कार्यक्रम के तहत चैती के प्रोत्साहन और संरक्षण के लिए युवा कलाकारों को तीन अगस्त से दस सितंबर तक प्रशिक्षण दिया गया। रविवार को मंच पर एक साथ जब बीस से अधिक प्रतिभागी उतरे तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। निर्देशक डॉ. प्रेमनारायण सिंह के देखरेख में कलाकारों ने ‘सेजिया से सइयां रूठी गइलन हो रामा, पिया से मिलन हम जाइब हो रामा...’ गीत के साथ ही चैती की कई बंदिशें पेश कीं। मुख्य अतिथि बीएचयू में संगीत की शिक्षक रहीं डॉ. वनमाला पर्वतकर ने युवाओं की सराहना की और सभी को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान डॉ. मधुमिता भट्टाचार्या, डॉ. संगीता घोष सहित कई लोग मौजूद रहे।
संस्कृति मंत्रालय की ओर से ‘धरोहर’ कार्यक्रम के तहत चैती के प्रोत्साहन और संरक्षण के लिए युवा कलाकारों को तीन अगस्त से दस सितंबर तक प्रशिक्षण दिया गया। रविवार को मंच पर एक साथ जब बीस से अधिक प्रतिभागी उतरे तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। निर्देशक डॉ. प्रेमनारायण सिंह के देखरेख में कलाकारों ने ‘सेजिया से सइयां रूठी गइलन हो रामा, पिया से मिलन हम जाइब हो रामा...’ गीत के साथ ही चैती की कई बंदिशें पेश कीं। मुख्य अतिथि बीएचयू में संगीत की शिक्षक रहीं डॉ. वनमाला पर्वतकर ने युवाओं की सराहना की और सभी को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान डॉ. मधुमिता भट्टाचार्या, डॉ. संगीता घोष सहित कई लोग मौजूद रहे।
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