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शिक्षा विभाग का खेल: 28 पैसे में बना रहे हैं खिलाड़ी, 2.50 लाख बच्चों का बजट बस 70 हजार; पढ़ें वाराणसी का हाल

Sun, 21 Sep 2025 11:15 AM IST
अमन विश्वकर्मा अभिषेक मिश्रा, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अभिषेक मिश्रा, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 21 Sep 2025 11:15 AM IST
सार

बेसिक शिक्षा विभाग में जिलेस्तर पर बच्चों की संख्या और शासन के बजट में कई गुना अंतर है, जो काफी निराशाजनक है। खेल सामग्री न होने से बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास पर भी असर पड़ सकता है।

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Education department Players are being made for 28 paise budget for 2.50 lakh children is just 70 thousand
प्राइमरी विद्यालय में बच्चों के कबड्डी खेल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Varanasi News: जिले के प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को पूरे शैक्षणिक सत्र में 26 खेल खिलाए जाते हैं। छोटे बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए उन्हें विभिन्न खेलों में प्रतिभाग तो कराया जाता है, लेकिन अभ्यास के लिए संसाधन मुहैया नहीं कराए जा रहे। 

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जिले भर में बेसिक शिक्षा विभाग में करीब 2.50 लाख बच्चे हैं, जिनके लिए शासन से महज 70 हजार रुपये का बजट ही जारी होता है। यानी प्रति बच्चे पर साल भर में खेल के लिए केवल 28 पैसे खर्च किए जाते हैं। इससे सिर्फ औपचारिकताएं ही पूरी हो पा रहीं हैं।
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राज्य सरकार की मंशा है कि ओलंपिक में अधिक से अधिक बच्चे प्रतिभाग करें और मेडल जीतें लेकिन शासन की ओर से जारी बजट इस प्रयास में व्यवधान बन रहा है। सभी जिलों के बेसिक शिक्षा विभाग को शासन हर साल अलग-अलग खेल कराने के लिए बजट मुहैया कराता है। 

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यह है हाल

इसी क्रम में वाराणसी को 60 से 70 हजार रुपये बजट मिलता है। जिले में 1144 प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या करीब 2.50 लाख है। ऐसे में जो बजट मिलता है वो प्रति बच्चे के हिसाब से लगभग 0.28 पैसे ही है। अब बढ़ती महंगाई के दौर में इस बजट में न तो खेल सामग्री खरीदी जा सकती है और न ही खेल प्रतियोगिता का आयोजन हो सकता है।

राष्ट्रीय खेल के लिए कोई बजट नहीं : देश का राष्ट्रीय खेल हॉकी है लेकिन उसे निचले पायदान पर बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है। प्राथमिक विद्यालयों में इस खेल के लिए न तो किट मौजूद होती है, न बच्चों के पास जूते होते हैं और न ही खेल मैदान हैं। शासन की ओर खेल प्रतियोगिता कराने के लिए हर साल 60 से 70 हजार का बजट आता है, वहीं खेल सामग्री खरीदने के लिए सिर्फ 5000 रुपये का बजट मिलता है।

10 लाख रुपये हो बजट तब सुधरेंगे हालात : जिले के खेल शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शासन का जो सालाना बजट है वह कम से कम 10 लाख रुपये का होना चाहिए। तब जा कर हालात सुधरेंगे। 

एथलेटिक्स, भारोत्तोलन जैसे कराए जाते हैं 26 खेल
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से पूरे सत्र में जो 26 खेल होते हैं उनमें एथलेटिक्स, भारत्तोलन, कुश्ती, कबड्डी, खोखो आदि जैसे खेल शामिल हैं। इसमें न तो अधिक संसाधन की आवश्यकता पड़ती है और न ही सामग्री की। तैराकी के लिए लाइफ गार्ड न होने, क्रिकेट के लिए बजट नहीं, फुटबाॅल के लिए जूते मोजे न होने, ताइक्वांडो के लिए सेफ गार्ड न होने के कारण यह बड़े खेल नहीं हो पाते।

बेसिक शिक्षा में खेल बजट कम है। इसको बढ़ाने के लिए पहले से मंथन चल रहा है। इसके लिए प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है। शासन से अनुमति मिलते ही बजट बढ़ाया जाएगा। - वेद प्रकाश राय, संयुक्त सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश

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