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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Durga Puja: After Navratri, mother's jewelery is kept in the locker, mother adorns herself with real gold

दुर्गा पूजा: नवरात्र के बाद लॉकर में रखे जाते हैं माता के गहने, असली सोने-चांदी के आभूषणों से सजती हैं मां

Wed, 11 Oct 2023 02:14 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Wed, 11 Oct 2023 02:14 PM IST
सार

नवरात्र के षष्ठी पर मां की प्रतिमा पूजा पंडाल में आने के बाद से इन गहनों से शृंगार होता है। मां के साथ गणेश जी, कार्तिकेय, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती आदि का भी गहने से ही शृंगार किया जाता है। नवरात्र खत्म होने के बाद ये गहने यूको बैंक के लॉकर में रख दिए जाते हैं।

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Durga Puja: After Navratri, mother's jewelery is kept in the locker, mother adorns herself with real gold
पाण्डेय हवेली के मूर्ति कारखाने में माॅं दुर्गा कि प्रतिमा को अंतिम रूप देता मूर्तिकार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काशी की पहली पूजा समिति वाराणसी दुर्गोत्सव सम्मिलनी में मां को असली सोने-चांदी के गहनों से सजाया जाता है। मां के साथ अन्य विग्रहों का भी गहनों से ही शृंगार किया जाता है। नवरात्र की दशमी के बाद मां के ये गहने बैंक के लॉकर में रख दिए जाते हैं। इन गहनों में गले का हार, माला, कंगन, मांगटीका, पायल सब शामिल हैं।

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102 साल पुरानी वाराणसी दुर्गोत्सव सम्मिलनी की ओर से बंगाली टोला इंटर कॉलेज में पूजा पंडाल स्थापित होता आ रहा है। लेकिन बीत छह साल से मां का शृंगार असली गहनों से हो रहा है। पूजा समिति के अध्यक्ष देवाशीष दास व चेयरमैन पार्थ प्रतिम दत्ता ने बताया कि कोलकाता के एक परिवार ने ये गहने दान में दिए हैं। इस परिवार की कई पीढि़यां समिति की सदस्य रही हैं। बाद में अन्य भक्तों ने भी दान किए। अब उन्हीं गहनों से मां का शृंगार किया जा रहा है।
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Durga Puja: After Navratri, mother's jewelery is kept in the locker, mother adorns herself with real gold
असली सोने-चांदी के आभूषणों से सजती हैं मां - फोटो : अमर उजाला
नवरात्र के षष्ठी पर मां की प्रतिमा पूजा पंडाल में आने के बाद से इन गहनों से शृंगार होता है। मां के साथ गणेश जी, कार्तिकेय, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती आदि का भी गहने से ही शृंगार किया जाता है। नवरात्र खत्म होने के बाद ये गहने यूको बैंक के लॉकर में रख दिए जाते हैं। पूजा समिति लॉकर का खर्च वहन करती है। देवाशीष दास ने बताया कि बनारस के अन्य पूजा पंडालों की पूजा बंगला विधि से होती है। कोलकाता से ढाक वाद्ययंत्र मंगाए जाते हैं। छह ढाकिया छह दिनों तक यहां रहते हैं। तीन दिनों तक भोग प्रसाद भक्तों में वितरण होता है। इसके अलावा दुर्गा पूजा पर आधारित ही प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं।

काशी नरेश के शार्गिदों ने की थी शुरुआत
वाराणसी दुर्गोत्सव सम्मिलनी की स्थापना काशी नरेश के शार्गिदों ने की थी। पूजा समिति के अध्यक्ष देवाशीष दास और चेयरमैन पार्थ प्रतिम दत्ता ने काशी नरेश के सचिव सहित अन्य पदों पर कार्य करने वाले पूर्णेंदु भट्टाचार्य, मंजूदास गुप्ता, प्रीति विश्वास, एके राय चौधरी सहित 20 सदस्यों ने सन 1922 में कैंटोनमेंट में इस पूजा समिति की स्थापना की थी। दो साल बाद यानी 1924 से पंडाल बंगाली टोला इंटर कॉलेज में लगने लगा। अभी इस समिति में 120 पदाधिकारी व सदस्य मौजूद हैं।
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