UP: महिला अस्पताल में कुत्ते ने तीन दिन में 14 लोगों को काटा, ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक घूम रहे आवारा कुत्ते
वाराणसी के मंडलीय अस्पताल में कुत्तों का भय बना हुआ है। महिला अस्पताल में गर्भवतियों को भी आने-जाने में दिक्कत हो रही है। यहां आने वालों ने शिकायत करते हुए बताया कि सुरक्षाकर्मी भी कुछ नहीं करते।
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कबीरचौरा में जिला महिला अस्पताल आवारा कुत्तों की समस्या से जूझ रहा है। तीन दिन में दो बच्चों समेत 14 लोगों को कुत्तों ने काटकर घायल किया है। घायलों में एक स्टाफ नर्स प्रतिमा, हाउसकीपर अनीता के आठ साल के बेटे और कर्मचारी माया के 5 साल के पौत्र भी शामिल हैं।
सोमवार सुबह अस्पताल के वार्ड में ड्यूटी पर तैनात प्रतिमा पर एक आवारा कुत्ते ने हमला कर घायल कर दिया। उन्हें तुरंत एंटी-रेबीज वैक्सीन देकर प्राथमिक उपचार किया गया। एसआईसी डॉ. नीना वर्मा ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल अस्पताल के मुख्य गेट को बंद करने का निर्देश दिया, ताकि कुत्ते अंदर न आ सके। वहीं, कुछ देर बाद नगर निगम की पहुंची और वार्ड में घूम रहे कुत्ते को पकड़ कर ले गई।
डॉ. नीना वर्मा ने बताया कि दो-तीन दिन से एक कुत्ते ने अस्पताल में आतंक मचा रखा था। अधिकांश लोगों को उसी ने काटा था। बताया कि मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा को देख अस्पताल प्रशासन ने न सिर्फ मुख्य गेट बंद कराया है, बल्कि सुरक्षा गार्डों को सतर्क रहने के निर्देश भी दिए हैं। अस्पताल आने-जाने वाले लोगों से भी सावधानी बरतने की अपील की गई है।
ओपीडी से इमरजेंसी तक कुत्तों का डेरा
मंडलीय, जिला और शहर के सरकारी अस्पतालों की ओपीडी और इमरजेंसी वार्डों के आसपास भी आवारा कुत्तों का जमावड़ा रहता है। सोमवार को मंडलीय अस्पताल की ओपीडी के बाहर कुत्ते घूमते दिखे। यही हाल इमरजेंसी और महिला अस्पताल के वार्ड के आसपास का भी रहा, जहां मरीजों को हर पल खतरे का अंदेशा रहा। सिक्योरिटी गार्ड तो बैठे रहते हैं, लेकिन वह भी कभी इन्हें भगाने की जरूरत नहीं समझते हैं।
अस्पताल प्रशासन की ओर से नगर निगम को कई बार पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की गई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के आदेशों के बावजूद आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। मरीजों के परिजन इस लापरवाही को लेकर प्रशासन और नगर निगम दोनों पर नाराजगी जता रहे हैं।