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डॉक्टर बने फरिश्ता: आठ साल से श्वास नली में फंसे सिक्के को 20 मिनट में निकाला, जल्द अस्पताल से मिलेगी छुट्टी

Tue, 02 Jul 2024 09:21 PM IST
आकाश दुबे माई सिटी रिपोर्टर, वाराणसी
माई सिटी रिपोर्टर, वाराणसी Published by: आकाश दुबे Updated Tue, 02 Jul 2024 09:21 PM IST
सार

आईएमएस बीएचयू कार्डियोथोरेसिक सर्जन, एनेस्थीसिया की टीम ने यह सर्जरी की है। सर्जरी के बाद 40 साल का मरीज स्वस्थ है। उसे जल्द अस्पताल से छुट्टी मिलेगी।

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Doctors of IMS BHU in Varanasi removed coin stuck in windpipe for eight years in 20 minutes
आठ साल से सांस की नली में फंसे सिक्के को निकाला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आईएमएस बीएचयू के डॉक्टरों ने एक मरीज के सांस की नली में आठ साल से फंसे 25 पैसे के सिक्के को 20 मिनट की सर्जरी कर निकाल दिया। कार्डियोथोरेसिक सर्जन, एनेस्थीसिया की टीम ने 40 वर्षीय मरीज की सर्जरी की है। डॉक्टर के अनुसार मरीज को अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। जल्द ही छुट्टी भी दे दी जाएगी।

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बीएचयू कॉर्डियोथोरेसिक विभाग के प्रोफेसर सिद्धार्थ लाखोटिया और एनीस्थीसिया विभाग के प्रोफेसर एसके माथुर के नेतृत्व वाली टीम ने सर्जरी की। प्रो. सिद्धार्थ ने बताया कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, मजबूत कफ रिफ्लेक्स की उपस्थिति के कारण किसी भी वस्तुओं का सांस की नली या फेफड़ों तक हवा पहुंचाने वाली मुख्य नली में जाना बहुत ही असामान्य है। बच्चों में यह आम बात होती है। पिछले आठ सालों से सिक्के के सांस की नली में फंसने की रिपोर्ट बहुत कम होती है। इस तरह की घटनाओं में जीवन का खतरा बना रहता है और रोगी का दम घुट सकता है। निमोनिया हो सकता है, और फेफड़े भी खराब हो सकते हैं।

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सांस लेने में कठिनाई या अन्य जटिलताओं के कारण मरीजों की मृत्यु हो जाती है। एनेस्थिसियोलॉजी विभाग की डॉ. अमृता का कहना है कि ऐसी प्रक्रियाओं के लिए बहुत उच्च स्तर की सटीकता की आवश्यकता होती है और थोड़ी सी भी असावधानी मरीज के जीवन के लिए खतरा पैदा कर सकती है। इस मामले में आठ साल से सांस की नली में पड़े सिक्के को निकालने के लिए एडवांस्ड रिगीद ब्रोंकोस्कोप का उपयोग किया गया। सर्जरी में त्रिवेन्द्र त्यागी, आनंद कुमार , ओम प्रकाश, बैजनाथ पाल , विकास एवं संजय ने भी अहम भूमिका निभाई।

आईएमएस बीएचयू में है सिक्का निकालने की सुविधा
सर्जरी करने वाली टीम में शामिल कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. रत्नेश ने बताया कि वयस्कों की सांस की नली से सिक्का या अन्य धातु निकालने की सुविधा पूर्वी उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों मे केवल आईएमएस, बीएचयू में ही उपलब्ध है। वयस्कों में यदि कोई व्यक्ति मुंह में कुछ भी रखकर सोता है या शराब और नशीली दवाओं के प्रभाव में अर्ध-चेतन अवस्था में है तो सांस की नली की समस्या बढ़ जाती है।

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दस साल से नली में फंसी चाबी को भी निकाला था
प्रो. सिद्धार्थ लाखोटिया का कहना है कि इसके पहले भी ऐसे मामलों में बीएचयू अस्पताल में अपनी टीम के साथ सर्जरी कर चुके हैं। मरीज भी पूरी तरह स्वस्थ है। उस मामले में अलमारी की चाबी 10 साल से सांस की नली में ही पड़ी हुई थी। फिर उसे सफलतापूर्वक निकाल दिया गया था।

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