एक जिला-एक उत्पाद में शामिल होगा रेशमी साड़ी उद्योग, डीएम ने सीएम योगी को लिखा खत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत पूर्वी यूपी के आजमगढ़ जिले में ब्लैक पाटरी का चयन किया गया है। योजना के तहत शिल्पकारों को सुविधा भी मुहैया कराई जा रही है, लेकिन ये उद्योग जनपद में कुछ लोगों के बीच एक विशेष क्षेत्र में सिमटा हुआ है।
आजमगढ़ के मुबारकपुर में रेशमी साड़ी उद्योग से काफी संख्या में लोग जुड़े हैं। व्यापक स्तर पर फैले इस उद्योग के ओडीओपी में शामिल नहीं होने से उन्हें शासन की कई योजनाओं से वंचित होना पड़ रहा है।
डीएम नागेन्द्र प्रसाद सिंह ने मुबारकपुर भ्रमण के बाद बुनकरों की मांग पर रेशमी साड़ी उद्योग को 'एक जनपद एक उत्पाद' योजना में शामिल करने के लिए शासन को फिर पत्र लिखा है। इसके पहले भी डीएम और कमिश्नर की ओर से शासन को पत्र भेजा जा चुका है।
जिले में रेशमी नगरी के नाम से मशहूर मुबारकपुर में रेशमी साड़ी उद्योग का काफी व्यापक स्तर पर फैला हुआ है। रेशमी साड़ियों का औद्योगिक धंधा वर्ष 2000 के पहले तक अपने परवान पर था। उस समय बुनकर खाड़ी देशों में जाना पसंद ही नहीं करते थो।
साल 2000 में हुए शिया-सुन्नी दंगे में एक दर्जन लोगों की हत्या हो जाने के बाद बाहरी व्यापारियों ने नगर में आना बंद कर दिया। रेशमी साड़ियों की चमक पर ग्रहण लग गया। बुनकरों को मजबूर होकर अपने परिवार की जीविका के लिए खाड़ी देशों का सहारा लेना पड़ा।
बुनकर परिवार पहले काफी खुशहाल था। हर दिन पांच सौ रुपये कमा लेते थे। अथक प्रयास के बावजूद यहां की निर्मित साड़ियों को कोई ब्रांड नहीं मिला। बनारसी ब्रांड के नाम से ही इसकी पहचान विश्वभर में बनी रही। उद्योग को ब्रांड ना मिलने से भी कहीं ना कहीं इस कारोबार के धराशाई होने का मुख्य कारण माना गया।
पिछले दिनों कस्बे में भ्रमण के लिए पहुंचे डीएम के सामने बुनकरों ने इस उद्योग को ओडीओपी के तहत लाने की मांग उठाई थी। जिलाधिकारी की ओर से बुनकरों की मांग पर शासन को पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा कि इस उद्योग को ओडीओपी में शामिल कराने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे।