Diwali 2023 Puja Time: लक्ष्मी पूजन के लिए इस बार मिलेगा 2.36 मिनट का मुहूर्त, ये है लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि
क्ष्मी पूजा के लिए महानिशीथ काल मुहूर्त रात 11 बजकर 39 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 31 मिनट तक है। इस मुहूर्त में लक्ष्मी पूजा करने से जीवन में अपार सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।
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धनतेरस के साथ ही छह दिनों का पंच दीपोत्सव शुक्रवार से आरंभ हो गया। मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धालुओं को अमावस्या व्यापिनी महानिशीथ काल में 2:36 घंटे का स्थिर लग्न में मुहूर्त मिलेगा। इसके अलावा लक्ष्मी पूजन के लिए तीन और स्थिर लग्न प्राप्त हो रहे हैं। दिवाली की पूजा का शुभ मुहूर्त 12 नवंबर की शाम 5 बजकर 40 मिनट से लेकर 7 बजकर 36 मिनट तक है। वहीं लक्ष्मी पूजा के लिए महानिशीथ काल मुहूर्त रात 11 बजकर 39 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 31 मिनट तक है। इस मुहूर्त में लक्ष्मी पूजा करने से जीवन में अपार सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।
बीएचयू के ज्योतिष विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. विनय पांडेय ने बताया कि अमावस्या व्यापिनी महानिशीथ काल 12 नवंबर को प्राप्त हो रहा है। धर्म शास्त्रों में दीपावली के पूजन में प्रदोष काल अति महत्वपूर्ण होता है। धर्मशास्त्रोक्त नियमानुसार दीपावली प्रदोष काल एवं महानिशीथ काल व्यापिनी अमावस्या में होती है, जिसमें प्रदोष काल का महत्व गृहस्थों व व्यापारियों के लिए होता है और महानिशीथ काल का तांत्रिकों के लिए उपयुक्त होता है। स्थिर लग्न में पूजा करना लाभप्रद होता है।
दीपावली के दिन का मुहूर्त
प्रदोष काल शाम 05:11 से 06:23 बजे तक रहेगा।
पूजन व खाता पूजन (स्थिर लग्न) प्रातः 06:41 बजे से लेकर 08:58 तक वृश्चिक लग्न
दिन 12:51 से 02:22 तक कुंभ लग्न
शाम 5:27 से 7:23 तक वृष लग्न
रात्रि 11:55 से 2:09 तक सिंह लग्न विद्यमान
दिवाली 2023 पूजा विधि (Diwali Puja Vidhi 2023)
दिवाली पर मुख्य रूप से मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा की जाती है। ऐसे में पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करें और एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। फिर इस चौकी पर बीच में मुट्ठी भर अनाज रखें। कलश को अनाज के बीच में रखें। इसके बाद कलश में पानी भरकर एक सुपारी, गेंदे का फूल, एक सिक्का और कुछ चावल के दाने डालें। कलश पर 5 आम के पत्ते गोलाकार आकार में रखें। बीच में देवी लक्ष्मी की मूर्ति और कलश के दाहिनी ओर भगवान गणेश की मूर्ति रखें। अब एक छोटी-सी थाली में चावल के दानों का एक छोटा सा पहाड़ बनाएं, हल्दी से कमल का फूल बनाएं, कुछ सिक्के डालें और मूर्ति के सामने रखें दें। इसके बाद अपने व्यापार/लेखा पुस्तक और अन्य धन/व्यवसाय से संबंधित वस्तुओं को मूर्ति के सामने रखें। अब देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश को तिलक करें और दीपक जलाएं।
इसके साथ ही कलश पर भी तिलक लगाएं। इसके बाद भगवान गणेश और लक्ष्मी को फूल चढ़ाएं और पूजा के लिए अपनी हथेली में कुछ फूल रखें। अपनी आंखें बंद करें और दिवाली पूजा मंत्र का पाठ करें। हथेली में रखे फूल को भगवान गणेश और लक्ष्मी जी को चढ़ाएं। लक्ष्मी जी की मूर्ति लें और उसे पानी से स्नान कराएं और उसके बाद पंचामृत से स्नान कराएं। मूर्ति को फिर से पानी से स्नान कराकर, एक साफ कपड़े से पोछें और वापस रख दें। मूर्ति पर हल्दी, कुमकुम और चावल डालें। माला को देवी के गले में डालकर अगरबत्ती जलाएं। फिर नारियल, सुपारी, पान का पत्ता माता को अर्पित करें। देवी की मूर्ति के सामने कुछ फूल और सिक्के रखें। थाली में दीया लें, पूजा की घंटी बजाएं और लक्ष्मी जी की आरती करें।