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दिनकर जयंती पर बीएचयू में रश्मिरथी का मंचन

Sat, 26 Sep 2015 02:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Sat, 26 Sep 2015 02:00 AM IST
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Dinkar Jubilee at the BHU Rashmirathe staged on
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के महाकाव्य ‘रश्मिरथी’ के भावों को शुक्रवार की शाम अभिनय में पिरोया गया। महाभारत के यशस्वी पात्र दानवीर कर्ण और कुंती के मर्मस्पर्शी संवाद लोगों के मन को छू गए। दिनकर की 107वीं जयंती पर आयोजित तीन दिनी कार्यक्रम की आखिरी शाम रश्मिरथी का नाट्य मंचन बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में किया गया। इस नाटक का निर्देशन किया मुजीब खान ने।
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सूर्य की आराधना से पुत्र को जन्म देने के बाद कुंती उसे एक पेटी में बंद कर नदी में बहा देती है। उसका यही पुत्र कर्ण जैसे यशस्वी नायक के रूप में महाभारत में प्रसिद्ध हुआ। कर्ण संवाद करता है-मैं उनका आदर्श कहीं जो व्यथा न खोल सकेंगे/पूछेगा जग किंतु पिता का नाम न बोल सकेंगे...। जिनका निखिल विश्व में कोई कहीं न अपना होगा/मन में लिए उमंग जिन्हें चिरकाल कलपना होगा। कर्ण चरित्र के उद्धार की चिंता
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प्रसंगों में कई बार मुखरित हुई। पात्रों की रूप सज्जा और वस्त्र विन्यास हर किसी को आकर्षित करने वाला था। शाम साढ़े छह बजे से शुरू हुए इस नाट्य मंचन को देखने के लिए स्वतंत्रता भवन में नाट्य प्रेमियों और रंगकर्मियों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। स्वतंत्रता भवन की दर्शक दीर्घा की सीढि़यों पर भी जगह नहीं बची थी। बीच बीच में दर्शक हर हर महादेव के जयकारे लगाते रहे।
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