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काशी ज्योतिष पीठः शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के नाम पर धर्म महामंडल में दो फाड़
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 17 Nov 2017 12:39 PM IST
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
- फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद पर दोबारा द्वारिका-शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का अभिषेक कराने की कुछ विद्वानों की मुहिम को झटका लग सकता है।
काशी विद्वत परिषद जहां हाईकोर्ट की ओर से इसके लिए नामित संस्था भारत धर्म महामंडल के साथ मिलकर स्वरूपानंद के नाम पर सहमति बनाने की कोशिशों में जुटी है, वहीं कुछ विद्वानों में इस प्रस्ताव को लेकर मतैक्य नहीं है।
कहा जा रहा है मठाम्नाय अनुशासन के तहत चयन प्रक्रिया अपनाए जाने पर इस पद के लिए स्वामी स्वरूपानंद उम्मीदवारी नहीं कर सकेंगे। भारत धर्म महामंडल के कुछ शीर्ष पदाधिकारियों को द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर के विद्या मठ से बुलावा भी आया लेकिन उन्होंने वहां जाने से इनकार कर दिया।
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अथर्ववेद की ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के लिए उम्मीदवारों के नाम आने लगे हैं। चंडीगढ़ से एक नाम का लिफाफा भारत धर्म महामंडल को भेजा गया है। इसकी पुष्टि गुरुवार को महामंडल के एक पदाधिकारी ने की।
उधर, काशी विद्वत परिषद से जुड़े एक पदाधिकारी का कहना है कि द्वारिका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के अलावा देश में इस पद के लिए दूसरा कोई योग्य आचार्य नहीं है। ऐसे में उनके नाम पर आम सहमति बनाई जाएगी और प्रस्ताव किया जाएगा। इसके बाद वे अपने जिस योग्य शिष्य को ज्योतिष पीठ का उत्तराधिकार देना चाहें, दे सकते हैं।
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काशी विद्वत परिषद जहां हाईकोर्ट की ओर से इसके लिए नामित संस्था भारत धर्म महामंडल के साथ मिलकर स्वरूपानंद के नाम पर सहमति बनाने की कोशिशों में जुटी है, वहीं कुछ विद्वानों में इस प्रस्ताव को लेकर मतैक्य नहीं है।
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कहा जा रहा है मठाम्नाय अनुशासन के तहत चयन प्रक्रिया अपनाए जाने पर इस पद के लिए स्वामी स्वरूपानंद उम्मीदवारी नहीं कर सकेंगे। भारत धर्म महामंडल के कुछ शीर्ष पदाधिकारियों को द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर के विद्या मठ से बुलावा भी आया लेकिन उन्होंने वहां जाने से इनकार कर दिया।
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अथर्ववेद की ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के लिए उम्मीदवारों के नाम आने लगे हैं। चंडीगढ़ से एक नाम का लिफाफा भारत धर्म महामंडल को भेजा गया है। इसकी पुष्टि गुरुवार को महामंडल के एक पदाधिकारी ने की।
उधर, काशी विद्वत परिषद से जुड़े एक पदाधिकारी का कहना है कि द्वारिका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के अलावा देश में इस पद के लिए दूसरा कोई योग्य आचार्य नहीं है। ऐसे में उनके नाम पर आम सहमति बनाई जाएगी और प्रस्ताव किया जाएगा। इसके बाद वे अपने जिस योग्य शिष्य को ज्योतिष पीठ का उत्तराधिकार देना चाहें, दे सकते हैं।
स्वरूपानंद से 22 को मिलेंगे धर्म महामंडल के जनरल सेक्रेटरी
ज्योतिष पीठ
- फोटो : अमर उजाला
भारत धर्म महामंडल के पदाधिकारियों का एक खेमा लगातार विद्या मठ के संपर्क में है। इस खेमे की कोशिश है कि स्वामी स्वरूपानंद को ही नामित कर दिया जाए लेकिन इसे लेकर भारत धर्म महामंडल की 36 सदस्यीय ऑल इंडिया कौंसिल के सदस्यों में मतैक्य नहीं है।
महामंडल के शीर्ष पदाधिकारियों का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार ही चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। मठाम्नाय अनुशासन में स्पष्ट उल्लेख है कि एक पीठ पर एक ही आचार्य का अभिषेक किया जा सकता है।
ऐसे में स्वामी स्वरूपानंद का दोबारा अभिषेक कराने की कोशिशें कितनी कारगर साबित होंगी, कहा नहीं जा सकता। भारत धर्म महामंडल के जनरल सेक्रेटरी शंभूनाथ उपाध्याय ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के चयन के मसले पर 22 नवंबर को द्वारिका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से मिलेंगे।
जनरल सेक्रेटरी ने बताया कि तीनों शंकराचार्यों का मार्गदर्शन लेने के लिए हाईकोर्ट ने आदेश दिया है। इस क्रम में वह शारदापीठ के शंकराचार्य से मिलने जाएंगे। उन्होंने बताया कि अगले शंकराचार्य के चयन में स्वामी स्वरूपानंद के नाम के प्रस्ताव के वह न तो पक्षधर हैं न विरोधी। हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में शर्तों के आधार पर मठाम्नाय अनुशासन के तहत ही प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
महामंडल के शीर्ष पदाधिकारियों का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार ही चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। मठाम्नाय अनुशासन में स्पष्ट उल्लेख है कि एक पीठ पर एक ही आचार्य का अभिषेक किया जा सकता है।
ऐसे में स्वामी स्वरूपानंद का दोबारा अभिषेक कराने की कोशिशें कितनी कारगर साबित होंगी, कहा नहीं जा सकता। भारत धर्म महामंडल के जनरल सेक्रेटरी शंभूनाथ उपाध्याय ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के चयन के मसले पर 22 नवंबर को द्वारिका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से मिलेंगे।
जनरल सेक्रेटरी ने बताया कि तीनों शंकराचार्यों का मार्गदर्शन लेने के लिए हाईकोर्ट ने आदेश दिया है। इस क्रम में वह शारदापीठ के शंकराचार्य से मिलने जाएंगे। उन्होंने बताया कि अगले शंकराचार्य के चयन में स्वामी स्वरूपानंद के नाम के प्रस्ताव के वह न तो पक्षधर हैं न विरोधी। हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में शर्तों के आधार पर मठाम्नाय अनुशासन के तहत ही प्रक्रिया अपनाई जाएगी।