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स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के लिए ढुंढिराज से मिलेगा प्रवेश
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काशी पुराधिपति को अन्न की भिक्षा देने वाली माता अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के लिए मंदिर में तैयारियां पूरी हो गई हैं। कोरोना काल के बाद भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। सुरक्षा के साथ ही प्रवेश और निकास के लिए अलग से इंतजाम किए गए हैं। मंदिर के महंत शंकर पुरी ने रविवार को तैयारियों का जायजा भी लिया।
अन्नपूर्णा मंदिर में धनतेरस से अन्नकूट तक स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दर्शन होंगे। मंदिर के महंत शंकरपुरी ने बताया कि भोर की मंगलबेला में माता का सविधि पूजन शृंगार करने के बाद आम दर्शनार्थियों के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार भक्तों को दर्शन दिया जाएगा। श्रद्धालुओं को बांसफाटक से कतारबद्ध होकर गेट नंबर एक ढुंढिराज से होते हुए मंदिर में प्रवेश मिलेगा। माता के दरबार में बनी अस्थायी सीढ़ी से प्रथम तल पर बाएं हाथ विराजी माता के स्वर्णमयी स्वरूप का दर्शन करने के बाद राममंदिर के रास्ते कालिकागली में भक्तों का निकास होगा। मंदिर के वालंटियरों को निर्देश दिए गए हैं कि दिव्यांग व बुजुर्गों को सीधे प्रवेश दिया जाए। मंदिर के प्रबंधक ने बताया कि कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की जाएगी। मंदिर में एक डॉक्टर की टीम की तैनाती चार दिन तक रहेगी। प्रतिबंधित वस्तुएं लेकर ना आएं जिससे कि दर्शन करने में किसी तरह की असुविधा हो।
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अन्नपूर्णा मंदिर में धनतेरस से अन्नकूट तक स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दर्शन होंगे। मंदिर के महंत शंकरपुरी ने बताया कि भोर की मंगलबेला में माता का सविधि पूजन शृंगार करने के बाद आम दर्शनार्थियों के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार भक्तों को दर्शन दिया जाएगा। श्रद्धालुओं को बांसफाटक से कतारबद्ध होकर गेट नंबर एक ढुंढिराज से होते हुए मंदिर में प्रवेश मिलेगा। माता के दरबार में बनी अस्थायी सीढ़ी से प्रथम तल पर बाएं हाथ विराजी माता के स्वर्णमयी स्वरूप का दर्शन करने के बाद राममंदिर के रास्ते कालिकागली में भक्तों का निकास होगा। मंदिर के वालंटियरों को निर्देश दिए गए हैं कि दिव्यांग व बुजुर्गों को सीधे प्रवेश दिया जाए। मंदिर के प्रबंधक ने बताया कि कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की जाएगी। मंदिर में एक डॉक्टर की टीम की तैनाती चार दिन तक रहेगी। प्रतिबंधित वस्तुएं लेकर ना आएं जिससे कि दर्शन करने में किसी तरह की असुविधा हो।
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