स्वामी किशोरदास देव ने कहा कि ईश्वर के प्रति प्रेम, श्रद्धा, समर्पण और सेवा का भाव ही भक्ति है। यह केवल पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ईश्वर की शिक्षाओं को जीवन में उतारना और नैतिक, दयालु व विनम्र व्यक्ति बनना ही सच्ची भक्ति है। संकटमोचन संकीर्तन मंडल की ओर से दुर्गाकुंड स्थित श्रीहनुमान प्रसाद पोद्दार अंधविद्यालय में चल रही भक्तमाल कथा के तीसरे दिन बुधवार को गोरीलाल कुंज श्रीधाम वृन्दावन के महंत स्वामी किशोरदास देव ने कहा कि भक्तमाल ग्रंथ के रचयिता नाभादास महाराज ने चारों युगों के भक्तों की शृंखला माला को इस ग्रंथ में समाहित किया है। इसमें भक्ति की अपार महिमा शामिल है। कथा श्रवण करने विजय कुमार मिश्र, नीरज दुबे, बलदाऊ पाठक, श्याम अग्रवाल, सुशील अग्रवाल आदि पहुंचे थे।