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श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई पुण्य की डुबकी
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
Updated Fri, 16 Jan 2015 01:32 AM IST
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कोहरे की चादर से ढंके आसमान और हाड़ कंपा देने वाली शीत लहर के बीच गुरुवार को मकर स्नान के लिए श्रद्धालु आस्था की डगर पर दिन भर चलते रहे। सात डिग्री तापमान के बीच भोर में जहां गलन से दांत कटकटा रहे थे, वहीं गंगा तटों पर हर हर महादेव के जयकारे गूंजने लगे और मढि़यों से कूद कर झमाझम पुण्य की डुबकी लगाई जाने लगी।
दशाश्वमेध समेत आठ से अधिक घाटों पर मेले जैसा मंजर था। गंगा पार रेत पर पतंगों के साथ महिलाओं ने भी पेच लड़ाए। इसी के साथ भगवान भाष्कर उत्तरायण हो गए और खरमास खत्म हो गया। अब शादियों के मंडप सजने शुरू हो जाएंगे।
हालांकि काशी में 14 जनवरी से ही मकर स्नान शुरू होने की वजह से बहुत धक्कामुक्की नहीं थी लेकिन भीड़ एक लय में निकलती रही। कोई कंधे पर झोला तो कोई गरीबों को दान के लिए खिचड़ी और कंबल लेकर चल रहा था।
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चितरंजन पार्क के रैन बसेरा में पूरे दिन भारी भीड़ उमड़ी रही। इस दौरान लोगों ने संतों में खिचड़ी भी बांटे। दशाश्वमेध, मान मंदिर, ललिता, प्रयाग, शीतला, अहिल्याबाई घाट आदि पर मकर स्नान के लिए भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शाम तक चला। घाटों पर स्नान के साथ ही दीपदान और चावल, उड़द की दाल के अलावा तिल के लड्डू, चूड़ा का गरीबों को दान कर लोगों ने पुण्य अर्जित किया।
बाबा को चूड़ा-मटर और मगदल का भोग
वाराणसी। काशी विश्वनाथ के दरबार में मकर संक्रांति पर देसी घी से तैयार चूड़ा मटर और बनारस की प्रसिद्ध मिठाई मगदल का भोग लगाया गया। दोपहर के वक्त दंडी संन्यासियों को खिचड़ी परोसी गई। संतों की आवभगत के बाद उन्हें वस्त्र और दक्षिणा भी दी गई। उधर, अन्नपूर्णा मठ मंदिर ट्रस्ट की ओर से ललिता घाट पर संक्रांति पर्व पर हजारों श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
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दशाश्वमेध समेत आठ से अधिक घाटों पर मेले जैसा मंजर था। गंगा पार रेत पर पतंगों के साथ महिलाओं ने भी पेच लड़ाए। इसी के साथ भगवान भाष्कर उत्तरायण हो गए और खरमास खत्म हो गया। अब शादियों के मंडप सजने शुरू हो जाएंगे।
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हालांकि काशी में 14 जनवरी से ही मकर स्नान शुरू होने की वजह से बहुत धक्कामुक्की नहीं थी लेकिन भीड़ एक लय में निकलती रही। कोई कंधे पर झोला तो कोई गरीबों को दान के लिए खिचड़ी और कंबल लेकर चल रहा था।
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चितरंजन पार्क के रैन बसेरा में पूरे दिन भारी भीड़ उमड़ी रही। इस दौरान लोगों ने संतों में खिचड़ी भी बांटे। दशाश्वमेध, मान मंदिर, ललिता, प्रयाग, शीतला, अहिल्याबाई घाट आदि पर मकर स्नान के लिए भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शाम तक चला। घाटों पर स्नान के साथ ही दीपदान और चावल, उड़द की दाल के अलावा तिल के लड्डू, चूड़ा का गरीबों को दान कर लोगों ने पुण्य अर्जित किया।
बाबा को चूड़ा-मटर और मगदल का भोग
वाराणसी। काशी विश्वनाथ के दरबार में मकर संक्रांति पर देसी घी से तैयार चूड़ा मटर और बनारस की प्रसिद्ध मिठाई मगदल का भोग लगाया गया। दोपहर के वक्त दंडी संन्यासियों को खिचड़ी परोसी गई। संतों की आवभगत के बाद उन्हें वस्त्र और दक्षिणा भी दी गई। उधर, अन्नपूर्णा मठ मंदिर ट्रस्ट की ओर से ललिता घाट पर संक्रांति पर्व पर हजारों श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।