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Dev Deepawali: काशी में पहली बार 40 साल पहले मनाई गई थी देव दीपावली, पंचगंगा घाट पर जले थे 15 हजार दीये

Wed, 05 Nov 2025 02:59 PM IST
प्रगति चंद अमन विश्वकर्मा/ प्रशांत शर्मा, अमर उजाला डिजिटल, वाराणसी।
अमन विश्वकर्मा/ प्रशांत शर्मा, अमर उजाला डिजिटल, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 05 Nov 2025 02:59 PM IST
सार

Dev Deepawali in Varanasi: काशी में देव दीपावली की शुरुआत 40 साल पहले हुई थी। पंचगंगा घाट पर 1985 में 15 हजार दीप जलाए गए थे। 

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Dev Deepawali celebrated for first time in Kashi 40 years ago at panchganga ghat in varanasi
देव दीपावली 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वर्ष 1985 में तीन उत्सवों को मिलाकर मैंने देव दीपावली की शुरुआत काशी के पंचगंगा घाट पर की थी। दिन रविवार का था और एक दिन पहले त्रिपुरोत्सव (त्रिपुरारी पूर्णिमा) मनाया जा रहा था। उक्त बातें मंगलागौरी मंदिर के महंत पंडित नारायण गुरु ने खास बातचीत में कही।

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उन्होंने बताया कि 40 वर्ष पहले इसका आयोजन पंचगंगा घाट किया गया था। यहां पांच नदियां (गंगा, यमुना, सरस्वती, किरण और धूतपापा) और पांच घाट (बालाघाट, केदारघाट, दुर्गा बिंदु माधव, गढ़वा और पुनिया) हैं। उस दिन ऊपर आकाशदीप और नीचे देवताओं के लिए दिए जल रहे थे। लगातार हो रहे इस आयोजन को देखते हुए 1995 में केंद्रीय देव दीपावली नामक एक संस्था भी बनाई गई।

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उन्होंने बताया कि दुर्गाघाट पर पहले मुक्केबाजी का खेल होता था। 1984 में मैं इसे देखने गया था। यहां की सीढ़ियों पर दीए जल रहे थे। यह नजारा काफी विहंगम और आकर्षक लगा। इसको देखकर मैंने सोचा कि ऐसा नजारा हर घाट पर होनी चाहिए। पूर्णिमा के एक दिन पहले त्रिपुरोत्सव मनाया जाता है। वर्ष 1992 तक मैंने करीब 25 घाटों पर इस आयोजन को पहुंचा दिया था। संकट मोचन और अन्नपूर्णा मंदिर के महंतों ने भरपूर सहयोग दिया। तीनों लोकों की न्यारी काशी में आज लोग इसका विहंगम नजारा देख रहे हैं।

नारायण गुरु ने बताया कि उस समय चाय-पान की दुकानों पर मैंने टीन के कनस्टर रख इसमें लोगों से तेल और घी डालने की अपील पर्ची बांटकर की थी। 10-10 दीए मांगे गए थे। देव दीपावली के दिन सात-आठ कनस्टर तेल और घी जुट गए थे। उस समय 100 दीपक और तेल की लागत करीब 10 रुपये थी। 

आज 200 से ऊपर है। 1986 में इस पुनीत कार्य में पूर्व काशी के राजा डॉ. विभूति नारायण का भी सहयोग मिला था। मंगला गौरी के महंत ने बताया कि दीपक जलाने के लिए मैं जब घाट पर गया तो मेरे साथ दर्जनों लोग थे। इसकी सूचना जैसे ही आसपास के मोहल्लों में हुई, वे लोग भी चले आएं। करीब 2000 लोगों की भीड़ पंचगंगा घाट पर थी।

मंगला गौरी के महंत ने बताया कि पिछले 12 वर्षों से मध्य प्रदेश के नर्मदा नदी किनारे भी काशी की तरह ही देव दीपावली का आयोजन करवाया जा रहा है। अमर कंटक, हड़िया गांव और होशंगाबाद के घाटों पर नर्मदा जयंती के दिन यह आयोजन होता आ रहा है। यहां की पूजा समितियों के माध्यम से प्रत्येक वर्ष यह आयोजन होता आ रहा है। यहां अलौकिक नजारे को देखने के लिएउ लाखों भक्त जुटते हैं।

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