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करार रद्द होने के बाद भी ‘आईभक्ति’ पर प्रसाद का धंधा
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 03 Feb 2016 01:52 AM IST
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अनुबंध रद्द होने के बाद भी फिल्म अभिनेता डिनो मॉरियो की ऑनलाइन कंपनी ‘आईभक्ति’ की बेबसाइट पर विश्वनाथ मंदिर के प्रसाद की बुकिंग खुलेआम की जा रही है। इसमें लाल पेड़ा के अलावा सूखे मेवे भक्तों को बेचे जा रहे हैं। अब कुछ और ऑनलाइन कंपनियां भी आईभक्ति के साथ प्रसाद के कारोबार में जुड़ गई हैं।
शिकायत मिलने के बाद मंदिर प्रशासन ने इस मामले की एनआईसी को जांच का निर्देश दिया है। इस मामले में आईभक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू हो गई है। आठ माह पहले प्रमुख सचिव (धर्मार्थ कार्य) नवनीत सहगल के निर्देश पर मंदिर प्रशासन ने ऑनलाइन प्रसाद का अनुबंध निरस्त कर दिया था।
अनुबंध निरस्त होने के बाद बाबा के भक्तों के साथ प्रसाद का गोरखधंधा जारी होने की जानकारी मिलने पर न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने इस फर्जीवाड़े पर मंगलवार को कार्यपालक समिति के सभापति मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण से चर्चा की। पता चला है कि ऑनलाइन कंपनी ने काशी में अपनी सेवाओं का विस्तार गंगा पूजा के रूप में कर लिया है।
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कंपनी की वेबसाइट पर विश्वनाथ मंदिर के प्रसाद के साथ ही गंगोत्री के जल (गंगा जल) की भी बुकिंग की जा रही है। तीन सौ रुपये में तीन पैकिंग गंगा जल श्रद्धालुओं को दिया जा रहा है। इसके अलावा 550 रुपये में लाल पेड़ा और इतनी ही कीमत पर सूखा मेवा प्रसाद के रूप में दिया जा रहा है। करार रद्द होने के बाद आईभक्ति के इस धंधे की जानकारी मिलने के बाद न्यास परिषद के अलावा मंदिर प्रशासन ने जांच शुरू करा दी है। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीएन द्विवेदी ने बताया कि आईभक्ति की ओर से प्रसाद की ऑनलाइन बुकिंग करने की शिकायत की जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट मिलते ही ऑनलाइन कंपनी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
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शिकायत मिलने के बाद मंदिर प्रशासन ने इस मामले की एनआईसी को जांच का निर्देश दिया है। इस मामले में आईभक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू हो गई है। आठ माह पहले प्रमुख सचिव (धर्मार्थ कार्य) नवनीत सहगल के निर्देश पर मंदिर प्रशासन ने ऑनलाइन प्रसाद का अनुबंध निरस्त कर दिया था।
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अनुबंध निरस्त होने के बाद बाबा के भक्तों के साथ प्रसाद का गोरखधंधा जारी होने की जानकारी मिलने पर न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने इस फर्जीवाड़े पर मंगलवार को कार्यपालक समिति के सभापति मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण से चर्चा की। पता चला है कि ऑनलाइन कंपनी ने काशी में अपनी सेवाओं का विस्तार गंगा पूजा के रूप में कर लिया है।
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कंपनी की वेबसाइट पर विश्वनाथ मंदिर के प्रसाद के साथ ही गंगोत्री के जल (गंगा जल) की भी बुकिंग की जा रही है। तीन सौ रुपये में तीन पैकिंग गंगा जल श्रद्धालुओं को दिया जा रहा है। इसके अलावा 550 रुपये में लाल पेड़ा और इतनी ही कीमत पर सूखा मेवा प्रसाद के रूप में दिया जा रहा है। करार रद्द होने के बाद आईभक्ति के इस धंधे की जानकारी मिलने के बाद न्यास परिषद के अलावा मंदिर प्रशासन ने जांच शुरू करा दी है। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीएन द्विवेदी ने बताया कि आईभक्ति की ओर से प्रसाद की ऑनलाइन बुकिंग करने की शिकायत की जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट मिलते ही ऑनलाइन कंपनी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।