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Varanasi News: बदल सकती है रोपवे की डिजाइन

Thu, 31 Oct 2024 01:35 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 31 Oct 2024 01:35 AM IST
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Design of ropeway may change
रोपवे को कैंट से गिरजाघर तक ही बनाने पर चल रहा विचार
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10 दिन बाद होने वाले प्रजेंटेशन में जनप्रतिनिधि और अधिकारियों की मौजूदगी में तय होगी रूपरेखा
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। रोपवे की डिजाइन बदल सकती है। कैंट से गोदौलिया तक जाने वाले रोपवे को गिरजाघर तक ही बनाने पर विचार चल रहा है। रोपवे का आखिरी स्टेशन कहां हो, इसके लिए सर्वे शुरू हो गया है। गिरजाघर, गोदौलिया और दशाश्वमेध प्लाजा में से किसी एक जगह पर अंतिम स्टेशन बनाया जाएगा।
एनएचएलएमएल की टेक्निकल टीम जीपीआर तकनीक से सर्वे करने में जुटी है। जल्द ही वह अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपेगी। इसके बाद प्रजेंटेशन में जनप्रतिनिधि और अधिकारियों की मौजूदगी में रूपरेखा तय होगी। रोप-वे की कुल दूरी 3.85 किलोमीटर है। इस योजना की लागत 807 करोड़ रुपये है। कैंट से गोदौलिया चौराहे तक कुल पांच स्टेशन होंगे। इसमें कैंट रेलवे स्टेशन, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया चौराहे पर स्टेशन बनेंगे।
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कैंट, काशी विद्यापीठ और रथयात्रा पर स्टेशन का निर्माण काम अंतिम दौर में है। गिरजाघर पर काम शुरू हुआ है। गोदौलिया पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है। वीडीए सचिव डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा के अनुसार अब तक की जानकारी के अनुसार कैंट से गोदौलिया तक रोपवे का निर्माण होना है। इसकी डिजाइन में परिवर्तन की कोई सूचना नहीं है। नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) की अधिकारी के अनुसार गिरजाघर पर काम चल रहा है। आगे के काम की जानकारी नहीं है। उधर, दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि गिरजाघर का पिछले दिनों निरीक्षण करने गया था। उस दौरान जनता की समस्याओं को ध्यान में रखकर रोपवे के अधिकारियों से आग्रह किया था इसे गिरजाघर तक की बनाएं। अभी तक मेरे आग्रह के बारे में कोई सूचना नहीं दी है।
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जीपीआर तकनीक से सर्वे के फायदे
जीपीआर तकनीक से सर्वे करने के कई फायदे हैं। इससे जमीन के नीचे की सभी सीवर, बिजली, पानी की लाइनों का पता चल सकेगा। इससे रोपवे के पिलर के लिए बेस बनाने में आसानी होगी। जहां पर संभव नहीं होगा, वहां पिलर के लिए खोदाई नहीं की जाएगी। नीचे सीवर की बड़ी लाइन है। इसे छेड़ने से शहर की सीवर व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इसे देखते हुए जीपीआर सर्वे कराया जा रहा है।



पहले चरण का काम मार्च 2025 तक पूरा होगा

एनएचएलएमएल के अनुसार पहले चरण का काम मार्च 2025 तक पूरा किया जाना है। सभी रोप-वे स्टेशन पर वाराणसी के प्रतीक को दिखाने का प्रयास है। रोप-वे में डमरू-त्रिशूल-शंख-नदी और घाट, काशी की थीम दिख रही है। देश की धार्मिक राजधानी काशी में नए भवनों को धार्मिक स्वरूप दिया जा रहा है। दुनिया का तीसरे और देश के पहले अर्बन पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए रोप-वे निर्माणाधीन है।

शिव और काशी थीम पर रोप-वे की डिजाइन

रोप-वे स्टेशन की डिजाइन शिव और काशी की थीम पर आधारित है। स्विट्जरलैंड से आए गंडोला को रोपवे में लगाया जाएगा। रोपवे पर सफर के दौरान तेज धूप का असर गंडोला पर न के बराबर होगा। इसकी डिजाइन में वेंटिलेशन का खास ख्याल रखा गया है। रोपवे बनने के बाद कैंट रेलवे स्टेशन से विश्वनाथ मंदिर और दशाश्वमेध घाट जाना आसान हो जाएगा।





कोट्स

रोपवे को लेकर कार्यदायी एजेंसी की टेक्निकल टीम सर्वे कर रही है। 10 दिन बाद वे रिपोर्ट देंगे। इसके बाद जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। इसमें कार्यदायी एजेंसी प्रजेंटेशन देगी। इसमें तय होगा कि रोपवे का आखिरी स्टेशन कहां हो। गिरिजाघर पर स्टेशन होगा तो यहां डिजाइन बदल जाएगी। - कौशलराज शर्मा, मंडलायुक्त
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