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Varanasi News: मनु शर्मा की रचनाधर्मिता और बावला की लोकचेतना पर हुआ मंथन

Sun, 30 Aug 2026 01:22 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2026 01:22 AM IST
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Deliberations on Manu Sharma's creative work and 'Bavla's' folk consciousness.
अर्दलीबाजार के राजकीय पुस्तकालय में हुई साहित्यिक  संघ की हिन्दी की धरोहर, काशी सृजन  परम्परा व
वाराणसी। राजकीय जिला पुस्तकालय में शनिवार को हिंदी की धरोहर काशी की सृजन परंपरा के तहत सप्तदश पुष्प में साहित्यकार मनु शर्मा और भोजपुरी के लोककवि राम जियावन दास ‘बावला’ के साहित्यिक योगदान पर चर्चा हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ‘सोच-विचार’ पत्रिका के प्रधान संपादक जितेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि मनु शर्मा किसी बने-बनाए रास्ते पर नहीं चले, कृष्ण की पौराणिक कथा को आत्मकथा की शैली में प्रस्तुत करने की उनकी कल्पना बिल्कुल नई थी।
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उन्होंने कहा कि बावला ने उद्भावनाओं से प्रेरणा लेकर रामचरित विषयक रचनाएं भोजपुरी में की। उनके गीतों का जनमानस पर तत्काल प्रभाव पड़ता है और उनकी गूंज लंबे समय तक बनी रहती है। उनका साहित्य भोजपुरी के साथ पूरे हिंदी क्षेत्र और देश के लिए महत्वपूर्ण अवदान है। नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने कहा कि मनु शर्मा काशी के रचनाकारों की पहली पंक्ति में विशिष्ट स्थान रखते हैं। वह बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न ऐसे लेखक थे, जिन्होंने साहित्य के अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका विपुल लेखन और विशद सार्वजनिक जीवन इस बात का प्रमाण है कि हिंदी को साधक, कर्मठ और समर्पित रचनाकारों ने समृद्ध किया। उन्होंने स्थानीय को सार्वभौम और पारंपरिक को आधुनिक बनाने का रचनात्मक अभियान चलाया।
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भारत अध्ययन केंद्र, बीएचयू के डॉ. अमित कुमार पांडेय ने कहा कि ‘बावला’ की कविता में भक्ति, लोकानुभव और सामाजिक यथार्थ का विशिष्ट संबंध दिखाई देता है। आयोजन के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्याश्री न्यास के सचिव डॉ. दयानिधि मिश्र ने काशी के रत्न के रूप में मनु शर्मा और बावला जी का एक आत्मीय परिचय दिया। सरस्वती-वंदना की प्रस्तुति विजेंद्र नाथ मिश्र ने की और संचालन अभिनव अरुण ने किया और आभार-प्रदर्शन का दायित्व प्रो. उमेश प्रसाद सिंह ने निभाया। इस अवसर पर नरेंद्र नाथ मिश्र, सुरेंद्र प्रताप सिंह, श्रद्धानंद, अत्रि भारद्वाज, मंजरी पांडेय आदि मौजूद रहे।
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