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Varanasi News: काशी जन संवाद में शहर के विकास पर मंथन, मांगे गए लिखित सुझाव; इन समस्याओं पर हुई चर्चा
Mon, 20 Apr 2026 01:15 PM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Mon, 20 Apr 2026 01:15 PM IST
सार
Varanasi News: काशी जन संवाद में वाराणसी शहर के विकास पर मंथन हुआ। इस जौरान लिखित सुझाव मांगे गए। कमिश्नरी सभागार में हुई बैठक में यातायात, पार्किंग और पर्यटन व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा हुई।
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smart city varanasi
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वाराणसी शहर के बेहतर विकास पर मंथन के लिए कमिश्नरी सभागार में काशी जन संवाद हुआ। अध्यक्षता कर रहे मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने शहर को बेहतर बनाने के लिए आमजन से लिखित सुझाव मांगे। ताकि उन पर प्राथमिकता के आधार पर कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके। कार्यक्रम का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से वाराणसी के सतत एवं समावेशी विकास को सुनिश्चित करना था। इसमें प्राप्त सुझावों को भविष्य की योजनाओं में शामिल किया जाएगा।
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कार्यक्रम में सबसे प्रमुख मुद्दा काशी में बढ़ते पर्यटन दबाव के कारण उत्पन्न हो रही यातायात व्यवस्था और पार्किंग की रही। लोगों ने सुझाव दिया कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सुदृढ़ किया जाए। रोडवेज बस अड्डों को शहर से बाहर शिफ्ट किया जाए। इससे जाम की समस्या कम हो सके। जल परिवहन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
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शहर की साफ-सफाई को लेकर लोगों ने जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई। खासकर काशी की संकरी गलियों को स्वच्छ रखने पर बल दिया गया। रामनगर क्षेत्र को विकसित करने का सुझाव आया, ताकि शहर के मुख्य हिस्सों पर भीड़ का दबाव कम किया जा सके।
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इसके अलावा गंगा पर दो सिग्नेचर ब्रिज बनाने का प्रस्ताव रखा गया और नमो घाट से लेकर आदिकेशव घाट तक के समग्र विकास की मांग की गई। अवैध कॉलोनियों का मुद्दा भी चर्चा में रहा। लोगों ने इन्हें वैध करने के लिए ठोस नीति बनाने का सुझाव दिया। वहीं हाई फ्लड लेवल के तहत गंगा के 200 मीटर के दायरे में निर्माण पर रोक को लेकर स्पष्ट नियम बनाने की भी मांग उठी।
मंडलायुक्त ने सभी सुझावों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया। बैठक में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, पर्यावरण एवं गैर-सरकारी संगठन, महिला सशक्तीकरण से जुड़े संगठन, व्यापार एवं बाजार संघ, होटल व रेस्टोरेंट संघ, पर्यटन गाइड, परिवहन संघ, घाट समितियां, विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स शामिल रहे।