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Varanasi News: काशी विद्यापीठ में डिग्री की फीस 200, सड़क पर मिलता है फाॅर्म
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गेट के बाहर की दुकानों पर डिग्री, माइग्रेशन का फाॅर्म खरीदते हैं छात्र
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में स्नातक, स्नातकोत्तर की परीक्षा पास करने के बाद अगर किसी को डिग्री, माइग्रेशन की जरूरत होती है तो उसको गेट के बाहर सड़क पर फाॅर्म मिलता है। कहीं 5 तो कहीं 10 रुपये में फाॅर्म खरीदकर छात्र उसको भरते हैं और फिर विश्वविद्यालय में बने काउंटर पर 200 रुपये फीस जमा कर डिग्री के लिए आवेदन करते हैं। गेट के बाहर एक दो नहीं बल्कि कई दुकानों के बाहर डिग्री, माइग्रेशन का फाॅर्म मिलने की जानकारी वाला बैनर टंगा भी दिख जाएगा।
विश्वविद्यालय में वाराणसी के साथ ही सोनभद्र, चंदौली, भदोही, मिर्जापुर में स्नातक, स्नातकोत्तर में एक लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। अंतिम वर्ष की परीक्षा पास करने के बाद विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की ओर से डिग्री दी जाती है। इसके अलावा दूसरे संस्थानों में दाखिला लेते समय माइग्रेशन की भी जरूरत होती है। विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की ओर से इसके लिए अलग से काउंटर भी बनाया गया है। यहां हर दिन छात्र-छात्राओं की भीड़ भी देखने को मिलेगी।
विश्वविद्यालय की ओर से डिग्री, माइग्रेशन का फाॅर्म पहले परीक्षा विभाग के काउंटर से ही मिलता था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से यह व्यवस्था बंद हो गई है। लिहाजा छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय के गेट के बाहर लगने वाली दुकानों से खरीदना पड़ता है। अब सवाल यह है कि विश्वविद्यालय के गेट पर एक दो नहीं बल्कि जितने भी दुकानें हैं, वो इन फाॅर्मों को बेधड़क फोटोकॉपी करवाकर बेच रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। अगर यह फाॅर्म विश्वविद्यालय में बने काउंटर से मिले तो छात्रों को बहुत सहूलियत होगी।
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वर्जन
विश्वविद्यालय में डिग्री लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन की भी व्यवस्था है। इसके बाद भी अगर किसी को ऑफलाइन फाॅर्म लेने की जरूरत है तो उसको परीक्षा विभाग के काउंटर से दिलवाने की व्यवस्था की जाएगी। गेट के बाहर फाॅर्म क्यों और कैसे मिल रहा है, इसको संबंधित लोगों से बातचीत कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी। - दीप्ति मिश्रा, परीक्षा नियंत्रक, काशी विद्यापीठ
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में स्नातक, स्नातकोत्तर की परीक्षा पास करने के बाद अगर किसी को डिग्री, माइग्रेशन की जरूरत होती है तो उसको गेट के बाहर सड़क पर फाॅर्म मिलता है। कहीं 5 तो कहीं 10 रुपये में फाॅर्म खरीदकर छात्र उसको भरते हैं और फिर विश्वविद्यालय में बने काउंटर पर 200 रुपये फीस जमा कर डिग्री के लिए आवेदन करते हैं। गेट के बाहर एक दो नहीं बल्कि कई दुकानों के बाहर डिग्री, माइग्रेशन का फाॅर्म मिलने की जानकारी वाला बैनर टंगा भी दिख जाएगा।
विश्वविद्यालय में वाराणसी के साथ ही सोनभद्र, चंदौली, भदोही, मिर्जापुर में स्नातक, स्नातकोत्तर में एक लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। अंतिम वर्ष की परीक्षा पास करने के बाद विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की ओर से डिग्री दी जाती है। इसके अलावा दूसरे संस्थानों में दाखिला लेते समय माइग्रेशन की भी जरूरत होती है। विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की ओर से इसके लिए अलग से काउंटर भी बनाया गया है। यहां हर दिन छात्र-छात्राओं की भीड़ भी देखने को मिलेगी।
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विश्वविद्यालय की ओर से डिग्री, माइग्रेशन का फाॅर्म पहले परीक्षा विभाग के काउंटर से ही मिलता था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से यह व्यवस्था बंद हो गई है। लिहाजा छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय के गेट के बाहर लगने वाली दुकानों से खरीदना पड़ता है। अब सवाल यह है कि विश्वविद्यालय के गेट पर एक दो नहीं बल्कि जितने भी दुकानें हैं, वो इन फाॅर्मों को बेधड़क फोटोकॉपी करवाकर बेच रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। अगर यह फाॅर्म विश्वविद्यालय में बने काउंटर से मिले तो छात्रों को बहुत सहूलियत होगी।
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विश्वविद्यालय में डिग्री लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन की भी व्यवस्था है। इसके बाद भी अगर किसी को ऑफलाइन फाॅर्म लेने की जरूरत है तो उसको परीक्षा विभाग के काउंटर से दिलवाने की व्यवस्था की जाएगी। गेट के बाहर फाॅर्म क्यों और कैसे मिल रहा है, इसको संबंधित लोगों से बातचीत कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी। - दीप्ति मिश्रा, परीक्षा नियंत्रक, काशी विद्यापीठ