फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Deepika, who had competed with Mary Kom, will now show her strength in America

Varanasi: मैरीकॉम से टक्कर ले चुकीं दीपिका अब अमेरिका में दिखाएंगी दम, कभी महीने के मिलते थे पांच सौ रूपये

Wed, 15 Nov 2023 04:08 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Wed, 15 Nov 2023 04:08 PM IST
सार

दीपिका ने बताया कि पहले काफी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा। खेल छात्रावास में रहने के दौरान घर से पांच सौ रुपये मिलते थे। इसी में पूरे महीने गुजारा करना होता था। एक जूता तीन साल तक पहनती थी। साई में चयन होने के बाद किट मिला। प्रतिभा की बदौलत हरियाणा और मुंबई के साईं सेंटर छात्रावास में ट्रेनिंग ली।

विज्ञापन
Deepika, who had competed with Mary Kom, will now show her strength in America
Varanasi - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कराटे में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खेल चुकीं दीपिका तिवारी यूपी बॉक्सिंग में नई पहचान बनकर उभरी हैं। साल 2000 में फटे जूते पहनकर प्रयागराज के बॉक्सिंग रिंग में उतरीं और पदक हासिल किया। हेड इंजरी से उबरने के बाद ककरमत्ता निवासी खिलाड़ी अमेरिका में होने वाली विश्व टाइटल जीतने की तैयारी में जुट गई हैं। फिलहाल लहुराबीर में अभ्यास कर रही हैं।

विज्ञापन


दीपिका ने बताया कि वर्ष 2000 में प्रयागराज में एशियन कराटे चैंपियनिशप में पदक के साथ बेहतरीन खिलाड़ी का अवॉर्ड भी जीता। बीकॉम में बॉक्सिंग की ओर रुझान हुआ। 2015 में कोच धर्मेंद्र चौहान और जनार्दन यादव के प्रशिक्षण में सीनियर स्टेट चैंपियनशिप में जीत दर्ज की। मिजोरम में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। बेहतर प्रशिक्षण के लिए साई छात्रावास हिसार में ट्रायल दिया और चयनित हुई। 2016 में आगरा के सैंट जॉन्स स्कूल में मैरीकॉम से मुकाबला हुआ। दीपिका ने बताया कि 2016 से लगातार सात बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप और दो राष्ट्रीय खेलों में प्रतिभाग किया। केरल में प्रीति झांगर और चंडीगढ़ में पूजा टोकस से मुकाबला हुआ। चीन में दीपिका को हेड इंजरी हुई थी। उन्हें आठ महीने तक रिंग से बाहर रहना पड़ा था। जून 2023 में दोबारा वापसी की।
विज्ञापन


घर से मिलते थे 500 रुपये

दीपिका ने बताया कि पहले काफी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा। खेल छात्रावास में रहने के दौरान घर से पांच सौ रुपये मिलते थे। इसी में पूरे महीने गुजारा करना होता था। एक जूता तीन साल तक पहनती थी। साई में चयन होने के बाद किट मिला। प्रतिभा की बदौलत हरियाणा और मुंबई के साईं सेंटर छात्रावास में ट्रेनिंग ली।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रोफेशनल बॉक्सिंग में मचाया धमाल

दीपिका ने 2017 में प्रोफेशनल बॉक्सिंग की ओर कदम बढ़ाया। अब तक वह चीन, अमेरिका और सिंगापुर के अलग-अलग शहरों में 17 चैंपियनशिप खेल चुकी हैं। कोलंबिया में पिछले वर्ष तीन प्रतियोगिता का कांट्रैक्ट हुआ है। यह 10 राउंड की होगी। तीन वर्ल्ड फाइट जीतने पर ओलंपिक में खेलने का मौका मिलेगा। यूरोप की टाइटल के बाद एशियन टाइटल में प्रतिभाग करेंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed