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वाराणसी: दुनिया छोड़ चुके दुराचारी और बदमाशों को मिलेगी ‘मुक्ति’, जानें कैसे

Sat, 30 Nov 2019 03:58 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 30 Nov 2019 03:58 PM IST
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Dead prisoner of documents will be destroyed permission of SSP in varanasi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

दुनिया छोड़ चुके दुराचारियों और बदमाशों का नाम पुलिस की फाइलों की कैद से बेहद मुश्किल से आजाद हो पाता है। हालांकि एसएसपी प्रभाकर चौधरी के तैनात होने के बाद जिला पुलिस इस संबंध में गंभीर हुई है। तय किया गया है कि हर महीने प्रत्येक थाने के स्तर पर पुलिस सत्यापन करेगी कि किस दुराचारी या बदमाश की मौत हो गई है। पुष्टि होने पर उनसे जुड़े दस्तावेज एसएसपी की अनुमति से नष्ट कर दिए जाएंगे।

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जिन दुराचारियों की मौत हो गई है, उनकी हिस्ट्रीशीट नष्ट किए जाने की प्रक्रिया जिले में शुरू भी कर दी गई है। 30 सितंबर 2019 को शिवपुर स्थित सदर तहसील परिसर में सारनाथ थाने के दुराचारी नितेश सिंह उर्फ बबलू की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।
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इसी तरह बीते साल कपसेठी थाना के एक दुराचारी की मौत बीमारी की वजह से हो गई थी। दोनों की मौत के बाद भी सारनाथ और कपसेठी थाने के ग्राम अपराध रजिस्टर में उनका नाम और उनके अपराध, परिवार, करीबियों, शरणदाता व गतिविधियों से संबंधित विवरण दर्ज था। 16 नवंबर को एसएसपी के आदेश से नितेश सहित दोनों लोगों की हिस्ट्रीशीट कैंट और बड़ागांव क्षेत्राधिकारी की देखरेख में नष्ट की गई।

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सत्यापन में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त
एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि सभी थानेदारों को कहा गया है कि प्रत्येक माह अपने थाने के दुराचारियों और गिरोहों से जुड़े बदमाशों का सत्यापन करा कर रिपोर्ट भेजें। जिन दुराचारियों या बदमाशों की मौत हो गई है या जो अत्यधिक उम्र के कारण नि:शक्त हो गए हैं, उनसे संबंधित दस्तावेजों को नष्ट कराया जाएगा।

इससे हमारे सामने स्थिति स्पष्ट रहेगी और यह पता चल सकेगा कि कौन सा दुराचारी या बदमाश सक्रिय है और कौन निष्क्रिय। इस संबंध में जो भी थानेदार लापरवाही करेगा, वह कार्रवाई की जद में आएगा।

ऐसे नष्ट की जाती है हिस्ट्रीशीट
हर एक थाने के ग्राम अपराध रजिस्टर(रजिस्टर नंबर आठ) के भाग पांच में दुराचारियों से संबंधित अपराधों का विवरण और उनके क्रियाकलापों का ब्योरा अंकित किया जाता है। दुराचारी की मृत्यु के बाद या अत्यधिक उम्र हो जाने के कारण या अच्छे आचरण के कारण संबंधित थाने के थानेदार की रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी के आदेश से उस सर्किल के क्षेत्राधिकारी की मौजूदगी में हिस्ट्रीशीट को जला कर नष्ट किया जाता है।

16 नवंबर से पहले एसएसपी आनंद कुलकर्णी की तैनाती के दौरान 20 दुराचारियों और एसएसपी रामकृष्ण भारद्वाज की तैनाती के दौरान 148 दुराचारियों की हिस्ट्रीशीट नष्ट की गई थी।

ये बदमाश जिंदा हैं या नहीं, पता नहीं
कई बदमाश ऐसे भी हैं जिनके बारे में पुलिस को पता ही नहीं कि वह जिंदा हैं या मर गए हैं। इनमें से दो-दो लाख के इनामी अताउर रहमान उर्फ बाबू उर्फ सिकंदर और सहाबुद्दीन 1997 से फरार हैं। इसी तरह विश्वास शर्मा उर्फ नेपाली 2005, मोहम्मद शमीम उर्फ सरफराज 2006, मनीष कुमार सिंह 2009, अजीम अहमद 2012,  सलीम उर्फ मुख्तार शेख और सुनील यादव 2013, इंद्रदेव सिंह उर्फ बीकेडी 2013, दीपक वर्मा उर्फ गुड्डू 2015 से फरार हैं।

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