काशी में टूटी परंपरा... : पहली बार बदली शिव बारात की तारीख, महाशिवरात्रि पर नहीं होंगे आयोजन; जानें खास
काशी में शिव बारात की अनोखी परंपरा एक जमाने से चली आ रही है। इस बार शिव बारात इस दिन नहीं निकलेगी। समिति के अनुसार, महाशिवरात्रि के अगले दिन यह आयोजन और भव्य तरीके से किया जाएगा।
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Mahashivratri 2025: शिव बारात समिति ने इस बार अपने 43वें शिव बारात के समय में बदलाव किए हैं। महाशिवरात्रि के अगले दिन यानी 27 फरवरी को बारात अपने परंपरागत तरीके से निकाली जाएगी। इस बार शिव बारात का थीम महाकुंभ रखा गया है। महाकुंभ के पलट प्रवाह के चलते प्रशासन की अपील पर बरात के समय में बदलाव करने का समिति ने निर्णय लिया है।
शिव बारात समिति के संरक्षक आरके चाैधरी ने बताया कि शोभायात्रा में इस बार विदेशों से भी सैकड़ों भक्त हिस्सा लेंगे। इस बार का थीम महाकुंभ रखा गया है। आने वाले भक्तों के ऊपर गंगा से छिड़काव होगा। तिलक लगाकर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि शिवबारात में भगवान भोले नाथ के भक्त अनोखे रूप में दिखेंगे। बैलगाड़ी पर दूल्हा बने भोलेनाथ होंगे तो बाराती बने काशीवासियों के बीच नागा साधु दिखेंगे। बनारसी मस्ती की झलक होगी। होलियाना अंदाज में निकलने वाले शिव बारात में दूसरे शहरों के लोग भी हिस्सा लेंगे।
देवाधिदेव महादेव के त्रिशूल पर बसी अविनाशी काशी में बाबा भोलेनाथ के भूत, पिशाच, ताल, बैताल, सभी देवी-देवताओं संग निकलने वाली दुनिया की पहली विश्व प्रसिद्ध शिव-बारात महाशिवरात्रि के एक दिन बाद 27 फरवरी, गुरुवार को शाम 7 बजे निकाली जाएगी।
बारात महामृत्युंजय मंदिर, दारानगर से उठकर मैदागिन, बुलानाला, चौक, बाबा धाम गोदौलिया होते हुए चितरंजन पार्क तक जाएगी। वहां वधू-पक्ष भांग ठंडई, माला-फूल से बारातियों की अगवानी करेगा। नगर में निकलने वाली विश्व प्रसिद्ध शिव-बारात 43वें वर्ष में प्रवेश कर स्वर्ण जयंती की ओर अग्रसर है।
इस बारात की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैं कि अब काशी के आस-पास के इलाके से ही नहीं बल्कि भूटान, मॉरीशस में भी शिव-बारात निकलने लगी है। इस शिव-बारात में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से विदेशी भी बाराती बनने आते हैं।