राष्ट्रीय बालिका दिवस: काशी के इस ‘गुरुकुल’ में होठों पर मंत्र और हाथों में शस्त्र लेकर चलती हैं बेटियां
देश-दुनिया में सर्वविद्या की राजधानी के रूप में विख्यात काशी में एक ऐसा ‘गुरुकुल’ भी है जो आधुनिकता की आबोहवा के बीच वैदिक युगीन शिक्षा और गुरु-शिष्य परंपरा की मिसाल है। क
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होठों पर मंत्र और हाथों में शस्त्र, पाणिनी कन्या महाविद्यालय की छात्राओं का यह रूप अपने आप में बेहद अनोखा है। आम घरों में बच्चियां खेल कूद में व्यस्त रहती हैं, लेकिन यहां पर आठ से 10 साल के उम्र की बच्चियां चारों वेद, ऋचाओं का पाठ करते हुए शस्त्र संचालन का भी प्रशिक्षण ले रही हैं।
देश-दुनिया में सर्वविद्या की राजधानी के रूप में विख्यात काशी में एक ऐसा ‘गुरुकुल’ भी है जो आधुनिकता की आबोहवा के बीच वैदिक युगीन शिक्षा और गुरु-शिष्य परंपरा की मिसाल है। करीब 40 साल पहले स्थापित इस केंद्र में वर्तमान देश के विभिन्न राज्यों की छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं।
देश की संस्कृति और परंपरा को बचाने की पहल
महमूरगंज स्थित पाणिनी कन्या महाविद्यालय में शस्त्र और शास्त्र की शिक्षा ले रही बच्चियां देश की संस्कृति और परंपरा को बचाने की एक पहल कर रही हैं। यहां पर प्रवेश लेने के बाद वैदिक पाठशाला की तरह ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद, सामवेद का अध्ययन करती हैं। प्राचार्य नंदिता कृष्ण शास्त्री ने बताया कि बच्चियां वेद पाठ और संस्कृत सीख रहीं हैं। ये अलग अलग प्रदेशों से आई हैं।
नेपाल से शिक्षा के लिए आईं हैं बच्चियां
यूपी, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान के साथ ही पड़ोसी देश नेपाल से भी लड़कियां यहां शिक्षा ले रही हैं। महाविद्यालय की प्राचार्या ने बताया अभी नेपाल की कुल पांच बच्चियां हैं।
तलवारबाजी, बॉक्सिंग, कराटे का भी प्रशिक्षण
पाणिनी कन्या महाविद्यालय में शास्त्र शिक्षा के साथ ही यहां पर लड़कियों को शस्त्र की शिक्षा भी दी जाती है। इसमें तलवारबाजी, बॉक्सिंग, कराटे भी सीखाया जाता है। ओपेन नेशनल कराटे प्रतियोगिता में बेटियों ने पदक भी जीता है।
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