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Varanasi News: मायके के दखल से टूट रहे बेटियों के घर

Tue, 04 Apr 2023 07:03 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 04 Apr 2023 07:03 PM IST
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Daughter house breaking due to the interference of maternal
मायके के दखल से टूट रहे बेटियों के घर
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वन स्टॉप सेंटर पर हर महीने आते हैं 10-15 केस
केस वन
रोहनिया थाना क्षेत्र की महिला ने बताया कि पति के साथ किसी न किसी बात को लेकर झगड़ा होता है। वह अलग होना चाहती है। जब काउंसिलिंग के लिए दोनों को सेंटर बुलाया गया तो मामला दूसरा निकला। पति का कहना था कि उसकी पत्नी घर की छोटी-छोटी बात अपने मायके में बताती है। मायके वालों की वजह से उसका गृहस्थ जीवन बर्बाद हो रहा है। दोनों को अलग-अलग समझाया गया, आखिरकार सुलह हो गई।

केस दो
कैंट थाना क्षेत्र की महिला ने कुछ माह पहले पुलिस में शिकायत दी थी। उसका कहना था कि पति हर समय झगड़ा और मारपीट करता है। वह बार-बार तलाक की धमकी देता है। महिला के पति को बुलाया गया तो उसने कहा कि पत्नी हर समय फोन पर मां और बहन से बात करती है। समय पर खाना भी नहीं देती। जब भी घर में कोई बात होती है तो मायके का उदाहरण देती है। मायके पक्ष के बिना सोचे समझे हर बात पर दखल से वह परेशान हो चुका है। काउंसलर ने काउंसलिंग की, जिससे उनका घर बिगड़ने से बच गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। बेटियों के गृहस्थ जीवन में मायके का अत्यधिक दखल घरों में दरार डाल रहा है। हर छोटी-छोटी बातों को लेकर मायके वालों की दखलअंदाजी पतियों और उनके परिवार को रास नहीं आ रही है। यही कारण है कि कई केसों में पति-पत्नी के बीच न केवल मतभेद हुए, बल्कि तलाक की भी नौबत आ चुकी है। तीन माह में वन स्टॉप सेंटर में ऐसे कई केस आए। केंद्र में तैनात मनोचिकित्सक दूरियां खत्म कर रिश्तों में नई जान डालने का प्रयास करती है।
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वन स्टॉप सेंटर प्रबंधक रश्मि दूबे ने बताया कि पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों पर कलह शुरू होती है। फिर माता-पिता, सास ससुर और दूसरों का हस्तक्षेप मामले को और बिगाड़ देता है। काउंसिलिंग में आने वाले प्रकरणों में देखा जाता है कि समझौते की गुंजाइश कितनी है। पहले हम समझने का प्रयास करते हैं। कई मामलों में पति या पत्नी पहले से अलग होने का निर्णय कर लेते हैं। ऐसे प्रकरणों को न्यायालय भेज दिया जाता है। रश्मि दूब ने बताया कि आजकल बेटियां हर बात अपने मायके में शेयर करती हैं, जो कई बार उनके पति को अच्छी नहीं लगती। ऐसे में मायके का दखल निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए। बेटी और दामाद दोनों की बात सुनकर फैसला करें।
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