वाराणसी: नेपाल की नृत्य शैली और काशी की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने मोहा मन
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भारत-नेपाल की संबंधों की प्रगाढ़ता को लेकर छावनी स्थित होटल में दोनों देश के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इसमें नेपाल की पारंपरिक नृत्य शैली और काशी की सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति ने लोगों का मन मोह लिया। इस दौरान बाबा विश्वनाथ और पशुपतिनाथ के बीच धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देने पर मंथन किया गया।
मुख्य अतिथि आईआईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आरके चौधरी ने कहा कि काशी विश्वनाथ और काठमांडू के पशु पतिनाथ एक-दूसरे के पूरक हैं। नेपाल और भारत का संबंध काल से ही चला आ रहा है। रोटी-बेटी का रिश्ता ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक धार्मिक, एतिहासिक स्थिति में बहुत अधिक समानता है। टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मेहता ने कहा कि इस तरह के संस्कृति, टूरिज्म बनारस में होने चाहिए। वर्ष 2017 में एक शाम बनारस के नाम का आयोजन किया गया था। आयोजन को नेपाल एंबेसी, नई दिल्लीद्वारा किया गया था।
नेपाल के कार्यवाहक राजदूत राम प्रसाद सुबेदी ने कहा कि यह नेपाल-भारत संबंधों को बढ़ावा देने के साथ-साथ विकास की ओर ले जाने में सांस्कृतिक कार्यक्रम मील का पत्थर साबित होते हैं। मारूनि देउड़ा तमांग सेलो, देशभक्ति उमेश शाही नेपाल के सुप्रसिद्ध नृत्य संयोजक व सांस्कृतिक सचिव के समूह द्वारा काशी की कथक कलाकार ममता टहन एवं रविशंकर मिश्र द्वारा नृत्य, शिव आनंद व ख्यात भजन गायक गणेश पाठक ने प्रस्तुति दी।
वीपी कोइराला इंडिया नेपाल फाउंडेशन एंबेसी नई दिल्ली की ओर से आयोजित कार्यक्रम में प्रोग्राम कोआर्डिनेटर रूचि सिंह, इंद्रकमल अरू ने कहा कि नेपाल के प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा भी आपसी रिश्तों की डोर को मजबूती से आगे बढ़ाना चाहते हैं।