{"_id":"5b3fa9bd4f1c1b0d278b4da6","slug":"dalai-lama-birthday-celebration-in-sarnath-at-varanasi","type":"story","status":"publish","title_hn":"सारनाथ में मना परमपावन दलाईलामा का 83वां जन्मदिवस, बच्चों ने दी रंगारंग प्रस्तुतियां ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सारनाथ में मना परमपावन दलाईलामा का 83वां जन्मदिवस, बच्चों ने दी रंगारंग प्रस्तुतियां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 06 Jul 2018 11:31 PM IST
विज्ञापन
गोष्ठी में बोलेते मुख्य अतिथि काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. टीएन सिंह
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बनारस में सारनाथ स्थित केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान में शुक्रवार को परम पावन दलाईलामा का 83वां जन्मदिवस मनोहारी नृत्य संगीत के कार्यक्रमों संग मना। पारंपरिक परिधानों में सजे संस्थान के विद्यार्थियों ने यहां तिब्बत के तीन प्रांतों के नृत्य की प्रस्तुति कर तिब्बत की संस्कृति से परिचित कराया।
वहीं, जीवन ज्योति विद्यालय की दिव्यांग छात्राओं ने मनोहारी नृत्य की प्रस्तुति देकर परम पावन दलाईलामा के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। इससे पहले परमपावन के चित्र के सम्मुख पंचदीप प्रज्ज्वलित किया गया, उन्हें खतक भेंट किया गया। दलाईलामा इन दिनों लद्दाख में हैं।
दलाईलामा के जन्मदिवस और संस्थान के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ विद्वत गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने कहा कि दलाईलामा के विचारों को वैश्विक स्तर पर आत्मसात करने की आवश्यकता है।
विज्ञापन
विशिष्ट अतिथि कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने कहा कि दलाईलामा के जीवन से सहज शांति प्राप्त होती है। उन्होंने हमेशा जीवन में क्रोध से बचने और शांति स्थापित करने का संदेश दिया। संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. राजा राम शुक्ल व प्रो. केपी पांडेय ने भी अपने विचार रखे।
अध्यक्षता करते हुए संस्थान के कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन ने कहा कि दलाईलामा ने विपदा को संपदा में अपनी साधना से बदला। विलुप्त हो रही नालंदा परंपरा को पुनर्जीवित कर वैश्विक पटल पर स्थापित किया। उनकी यही कोशिश है कि किस तरह व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया जाए।
आज के दिन की सार्थकता तभी है जब हम इसमें अपना सहयोग करें। प्रो. वांग्चुक दोर्जे, सुमेध थेरो, प्रो. केके जैन, प्रो. लल्लन मिश्र, प्रो. रमेश द्विवेदी ने भी अपने विचार रखे। संचालन डॉ. राम सुधार सिंह व धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव प्रो. आरएस उपाध्याय ने किया।
विज्ञापन
वहीं, जीवन ज्योति विद्यालय की दिव्यांग छात्राओं ने मनोहारी नृत्य की प्रस्तुति देकर परम पावन दलाईलामा के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। इससे पहले परमपावन के चित्र के सम्मुख पंचदीप प्रज्ज्वलित किया गया, उन्हें खतक भेंट किया गया। दलाईलामा इन दिनों लद्दाख में हैं।
विज्ञापन
दलाईलामा के जन्मदिवस और संस्थान के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ विद्वत गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने कहा कि दलाईलामा के विचारों को वैश्विक स्तर पर आत्मसात करने की आवश्यकता है।
विज्ञापन
विशिष्ट अतिथि कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने कहा कि दलाईलामा के जीवन से सहज शांति प्राप्त होती है। उन्होंने हमेशा जीवन में क्रोध से बचने और शांति स्थापित करने का संदेश दिया। संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. राजा राम शुक्ल व प्रो. केपी पांडेय ने भी अपने विचार रखे।
अध्यक्षता करते हुए संस्थान के कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन ने कहा कि दलाईलामा ने विपदा को संपदा में अपनी साधना से बदला। विलुप्त हो रही नालंदा परंपरा को पुनर्जीवित कर वैश्विक पटल पर स्थापित किया। उनकी यही कोशिश है कि किस तरह व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया जाए।
आज के दिन की सार्थकता तभी है जब हम इसमें अपना सहयोग करें। प्रो. वांग्चुक दोर्जे, सुमेध थेरो, प्रो. केके जैन, प्रो. लल्लन मिश्र, प्रो. रमेश द्विवेदी ने भी अपने विचार रखे। संचालन डॉ. राम सुधार सिंह व धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव प्रो. आरएस उपाध्याय ने किया।