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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Dairy Mega-Event in Kashi 2000 women attended Aradhika 22 litre yield emerged star Dilruba third place

काशी में डेयरी का महाकुंभ: 22 लीटर दूध वाली आराधिका बनी स्टार; दिलरूबा का थर्ड नंबर; गाय-भैंस देखने को भीड़

Sat, 19 Sep 2026 07:20 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sat, 19 Sep 2026 07:20 PM IST
सार

बीएचयू में आयोजित रंगीलो काशी में 22 लीटर दूध देने वाली आराधिका आकर्षण का केंद्र बनी। मेले में करीब 2000 महिला पशुपालक पहुंचीं। आजमगढ़ से महिलाएं पांच बसों में सवार होकर आईं। पशुपालकों को कम लागत में अधिक दूध उत्पादन, बेहतर चारा प्रबंधन और आधुनिक तकनीक की जानकारी दी गई। आयोजन में पशु प्रदर्शनी और तकनीकी सत्र भी हुए।

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Dairy Mega-Event in Kashi 2000 women attended Aradhika 22 litre yield emerged star Dilruba third place
दो दिवसीय ग्रामीण उत्सव ‘रंगीलो काशी’ में माैजूद किसान महिलाएं। - फोटो : संवाद

विस्तार

बीएचयू के हेलीपैड मैदान में शनिवार को तीन साल की आराधिका को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी थी। हरियाणा के जींद से आए बिट्टू की यह गाय यहां 22 लीटर दूध दे रही थी। बिट्टू के मुताबिक, घर पर आराधिका करीब 27 लीटर दूध देती है, लेकिन लंबी दूरी की यात्रा के कारण यहां दूध उत्पादन कुछ कम हुआ। रंगीलो काशी के नंदी शो में आराधिका जैसी पशुओं ने जहां लोगों का ध्यान खींचा, वहीं मैदान में जुटे सैकड़ों पशुपालक यह जानने में लगे थे कि उनके पशुओं से दूध उत्पादन कैसे बढ़े और लागत कैसे घटे।

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काशी में पहली बार आयोजित दो दिवसीय ग्रामीण उत्सव ‘रंगीलो काशी’ में शनिवार को गांवों की डेयरी अर्थव्यवस्था की बदलती तस्वीर दिखाई दी। कोई बेहतर नस्ल की जानकारी लेने पहुंचा था तो कोई चारे का सही प्रबंधन सीखने। महिलाएं यह समझने में जुटी थीं कि रोजाना कुछ लीटर दूध बेचकर घर की आमदनी को कैसे बढ़ाया जा सकता है। 19 और 20 सितंबर को होने वाले इस आयोजन में पशु प्रदर्शनी के साथ तकनीकी सत्र, कार्यशालाएं, प्रैक्टिकल डेमो और डेयरी से जुड़े नए उपकरणों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

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गोशाला की हवा से खेत के पानी तक तकनीक
मेले में लगे स्टॉलों पर डेयरी और खेती से जुड़ी कई तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। ओजोन क्रॉप इनोवेट कंपनी की ओर से किसानों के लिए विभिन्न मशीनें प्रदर्शित की गईं। फ्यूमिजोन एयर ट्रीटमेंट मशीन के बारे में अभिजीत सोमलवार ने बताया कि यह गोशाला की दूषित हवा को बाहर निकालकर परिसर में हवा की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए तैयार की गई है।

डॉ. भाग्यश्री भटनागर ने नैनो बबल जनरेटर के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मशीन पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में मदद करती है। कृषि क्षेत्र में इसके संभावित उपयोग की जानकारी भी किसानों को दी गई।

बीएचयू के पशु चिकित्सालय एवं पशु विज्ञान संकाय से जुड़े डॉ. अमृत, डॉ. पप्पू कुमार, डॉ. अनुज और डॉ. प्रमोद कुमार ने पशुओं के पोषण, स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने साइलज समेत पशुओं के आहार प्रबंधन से जुड़े उपायों के बारे में बताया।

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हर जिले में डेयरी सहकारी समिति बनाने की तैयारी
डेयरी विकास आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर जिले में डेयरी सहकारी समिति स्थापित करना और ब्लॉक स्तर पर राष्ट्रीय गोकुल मिशन को आगे बढ़ाना है। इससे पशुपालकों को संगठित बाजार और डेयरी व्यवस्था से जोड़ने पर जोर है।

मेले में किसानों के होनहार बच्चों और डेयरी विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित भी किया गया। संस्थानों, स्टार्टअप, सहकारी समितियों, सरकारी विभागों और ग्रामीण उद्यमों ने कृषि एवं डेयरी क्षेत्र से जुड़े समाधान प्रदर्शित किए।

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बीएचयू के मिर्जापुर परिसर में भी डेयरी
बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय भी गौपालन और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में काम कर रहा है। मिर्जापुर परिसर में डेयरी की व्यवस्था है, जहां पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाती हैं। उन्होंने कहा कि पशुपालन और डेयरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ा है। ऐसे आयोजन पशुपालकों को नई जानकारी और तकनीक से जोड़ने में उपयोगी हो सकते हैं।

रंगीलो काशी में आराधिका जैसी अधिक दूध देने वाली पशुओं की नस्ल से लेकर गांव की तीन लीटर दूध बेचने वाली राजमुनी देवी तक, तस्वीर अलग-अलग जरूर है, लेकिन लक्ष्य एक ही दिखा- पशुपालन से आमदनी बढ़ाना। यही वजह है कि दो दिन के इस आयोजन में पशु प्रदर्शनी के साथ किसानों की निगाहें उन तकनीकों और जानकारियों पर भी टिकी हैं, जिन्हें वे लौटकर अपने गांवों में आजमाना चाहते हैं।

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