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पश्मीना के बचे धागों से बनेंगे दरी और कंबल
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ठंड में गर्माहट देने वाली पश्मीना के बचे धागे से अब खादी ग्रामोद्योग आयोग दरी व कंबल तैयार करेगा। इसके लिए खादी ग्रामोद्योग ने काम भी शुरू कर दिया है। बचे धागे से बना कंबल शॉल जितनी ही गर्माहट देगा। खादी ग्रामोद्योग आयोग की ओर से पश्मीना शॉल बनाने के दौरान जो धागे बच जाते हैं उसका भी प्रयोग किया जाएगा।
सैंपल के तौर पर एक कंबल तैयार किया गया है। पश्मीना शॉल तैयार करने वाले बुनकर ही कंबल व दरी तैयार करेंगे। इसमें करीब पांच हजार की लागत आई है। इस कंबल का वजन दो किलो दो सौ ग्राम है। यह कंबल ग्राहकों को 3500 रुपये में मिलेगा।
एक किलो में मिलता है 200 ग्राम पश्मीना
पश्मीना शॉल बनाने अगर एक किलो पश्मीना धागे का प्रयोग किया जाता है तो इसमें केवल 200 ग्राम ही सही पश्मीना मिलता है। बाकी 800 ग्राम धागे खराब हो जाते हैं। अब इसी वेस्ट प्रोडक्ट से कंबल व दरी तैयार की जाएगी।
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वर्जन
पश्मीना के बचे धागे से कंबल व दरी तैयार किया जाएगा। इससे जहां एक ओर वेस्ट मैटेरियल का प्रयोग होगा। वहीं दूसरी ओर बुनकरों का रोजगार भी बढ़ेगा। - डीएस भाटी, निदेशक खादी ग्रामोद्योग आयोग
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सैंपल के तौर पर एक कंबल तैयार किया गया है। पश्मीना शॉल तैयार करने वाले बुनकर ही कंबल व दरी तैयार करेंगे। इसमें करीब पांच हजार की लागत आई है। इस कंबल का वजन दो किलो दो सौ ग्राम है। यह कंबल ग्राहकों को 3500 रुपये में मिलेगा।
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एक किलो में मिलता है 200 ग्राम पश्मीना
पश्मीना शॉल बनाने अगर एक किलो पश्मीना धागे का प्रयोग किया जाता है तो इसमें केवल 200 ग्राम ही सही पश्मीना मिलता है। बाकी 800 ग्राम धागे खराब हो जाते हैं। अब इसी वेस्ट प्रोडक्ट से कंबल व दरी तैयार की जाएगी।
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पश्मीना के बचे धागे से कंबल व दरी तैयार किया जाएगा। इससे जहां एक ओर वेस्ट मैटेरियल का प्रयोग होगा। वहीं दूसरी ओर बुनकरों का रोजगार भी बढ़ेगा। - डीएस भाटी, निदेशक खादी ग्रामोद्योग आयोग