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गंगा लाल निशान के करीब, कृषि भूमि के साथ फसलें हुईं तबाह

Sat, 29 Aug 2020 09:54 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 29 Aug 2020 09:54 PM IST
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Crops destroyed along agricultural land, close to Ganges red mark
नरही क्षेत्र के इच्छाचौबे पूरा गांव के उपजाऊ भूमि को काटती गंगा नदी की लहरे। - फोटो : BALLIA
रामगढ़। शनिवार की शाम चार बजे गंगा का जलस्तर 57.42 मीटर दर्ज किया गया। बाढ़ विभाग के अनुसार गंगा में प्रति घंटा दो सेंटीमीटर की दर से पानी बढ़ रहा है। जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो देर रात तक गंगा लाल निशान 57.615 मीटर को पार कर जाएंगी। ऐसे में तमाम गांव बाढ़ की जद में आ जाएंगे। इसे लेकर ग्रामीणों में जहां दहशत है वहीं प्रशासन स्थिति को लेकर लगातार सतर्क है। शनिवार को तमाम गांवों की कृषि भूमि गंगा में समा गई। साथ ही फसलें भी तबाह हुईं। परेशान और मायूस किसानों ने माथा पकड़ लिया।
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किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि चार दशकों में मझौवा से लेकर इब्राहिमाबाद नवबरार तक अरबों रुपए बाढ़ और कटान के नाम पर खर्च किए गए। लेकिन सभी बेकार साबित हुए और दर्जनों गांव गंगा में समा गए। गंगा के मुहाने पर बसे लोग कहते हैं कि बाढ़ व कटान के नाम पर इस बार भी करीब 62 करोड़ रुपया खर्च किया गया। ताकि गंगापुर से लेकर नौरंगा तक गांवों को बाढ़ से बचाया जा सके। साथ ही नदी की धारा को ड्रेजिंग कर एक सहायक नदी इसलिए बनाई गई कि एनएच 31 की मुश्किलें कम हो सकें। लेकिन सभी प्रोजेक्ट गंगा की तेज उठती लहरों के आगे बौना साबित हो रहा है। शनिवार को डेंजर प्वाइंट गंगापुर से लेकर के हरपुर दुबे छपरा नौरंगा तक नदी ने करीब पांच बीघा कृषि भूमि लील लिया। मझौवा दियरी, बाबू बेल, बादिलपुर, जग छपरा आदि निचले हिस्से के गांवों में पानी फैलना शुरू हो गया है और इन मौजों में खड़ी फसलें डूब चुकी हैं। शुकुल छपरा के दशरथ तुरहा, रामेश्वर तुरहा, वीरेंद्र, महेश, जिउत आदि ने बताया कि लगान पर लेकर परवल की खेती की थी, बाढ़ से बर्बाद हो गई है।
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विधायक के साथ एसडीएम ने लिया बाढ़ का जायजा
रामगढ़। गोपालपुर बस्ती के रहवासी बाढ़ को लेकर काफी भयभीत हैं। ग्रामीणों की सूचना पर शुक्रवार की शाम विधायक सुरेंद्र नाथ सिंह के साथ एसडीएम बैरिया सुरेश कुमार पाल ने निरीक्षण कर बाढ़ विभाग के अधिकारियों को तत्काल बचाव कार्य शुरू करने का निर्देश दिया। शनिवार को बाढ़ विभाग द्वारा आनन-फानन में घाट के पास से ही बालू खनन कर बोरी में भर कर किनारे पर डाला जाने लगा। घाट के पास खनन पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई और विभाग से खनन रोकने की मांग की। मौके पर पहुंचे जेई से भी ग्रामीणों ने घाट पर मिट्टी खनन से मना किया। ग्रामीणों ने कहा कि घाट के पास खनन बाढ़ के दौरान खतरनाक साबित हो सकता है, लिहाजा कैरेज की मिट्टी-बालू को लाकर बोरियों में डाला जाए। इस मौके पर पंकज कुमार तिवारी, मिथिलेश तिवारी, मंटू तिवारी, महेंद्र नाथ तिवारी, दीपू तिवारी, सुधीर तिवारी आदि रहे।
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इंसेट:
कटान से इच्छा चौबे के पूरा गांव में मंडराया खतरा
नरही। गंगा में बढ़ते जलस्तर से शाहपुर बभनौली पुरानी बस्ती एवं इच्छा चौबे का पूरा गांव के पास कटान शुरू हो गया है, जिसके चलते इस गांव के लोग सकते में हैं। कटान जल्द न रोका गया तो इच्छा चौबे का पूरा भी गंगा में समा सकता है। इसके बगल में स्थित शाहपुर बभनौली गांव का करीब आधा हिस्सा गंगा में पहले ही विलीन हो चुका है। यहां से 200 से अधिक लोग पलायन कर चुके हैं।
इंसेट:
दहशत के मारे जागकर बिताई रात
लालगंज। जगदीशपुर गांव के एक घर के सामने शुक्रवार की देर रात गंगा की लहरों से भूमि कटकर गिरने लगी तो उसकी तेल आवाज सुन लोगों की नींद खुल गई। आनन फानन में सभी लोग घर से बाहर निकल आए और पूरी रात जागकर बिताई। सुबह होते ही लोागें ने बोरी में बालू आदि रखकर कटान को रोकने का प्रयास किया।

दोकटी थाना क्षेत्र के जगदीशपुर गांव निवासी श्रीभगवान पाण्डेय का घर कटान से मात्र दो से मीटर की दूरी पर है। कई दिनों से पुरवइया हवा के कारण गंगा नदी में उठती लहरों से टकराकर मिट्टी कटन रही है। शुक्रवार की देर रात को गंगा कि लहरों से किनारे की मिट्टी नदी में गिरने लगी। तो उसकी आवाज से श्रीभगवान पाण्डेय की नींद खुली और परिवार को घर से बाहर निकाला। श्रीभगवान ने बताया कि कई सालों में एक-एक कर गांव के तीन चौथाई लोगों का घर गंगा में समाहित हो चुका है। अब बचे एक चौथाई लोगों के आशियाने पर खतरा मंडरा रहा है। क्योंकि बचाव को लेकर कोई ठोस कार्य नहीं कराया गया है।
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