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अपराधियों में दिख रहा UP पुलिस का खौफ, 45 ने बदलवा ली जेल, कई ने जमानत कराई रद्द
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 29 Jan 2018 11:02 AM IST
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मुठभेड़
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश में बढ़ते अपराध को देखकर पुलिस ने प्रदेश को अपराधियों से मुक्त करने के लिए इन पर शिंकजा कसना शुरू किया। यूपी पुलिस ने बीते दिनों प्रदेश में कई अपराधियों को इनकाउंटर में मार गिराया। वहीं कई गिरफ्तार भी किए गए। इन पुलिस इनकाउंटर के बाद अपराधियों मे खौफ नजर आ रहा है।
जिसके चलते आजमगढ़ में 36 दिनों के भीतर कुल 45 अपराधी जेल से बाहर आने की बजाय दूसरी जेलों में अपना स्थानांतरण करा लिया है। कई ने अपनी जमानत रद्द करवा ली। 45 अपराधियों में 15 गैंग लीडर शेष इनके गुर्गे, शूटर और सेवादार शामिल हैं।
ये अपने मुखिया के पकड़े जाने के बाद उनकी सेवा करने के लिए जेल के भीतर गए थे। पुलिस ऐसे बदमाशों की सूची तैयार कर उनका आपराधिक डाटा उन जिलों की पुलिस को सौंपेगी, ताकि जेल बदलने का फायदा अपराधी न उठा पाए।
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अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस ने मार्च 2017 से अपराधियों के विरुद्ध खुली जंग छेड़ दी। पूर्वांचल में आतंक का पर्याय बने तीनों बदमाशों सुजीत सिंह बुढ़वा, जयहिंद यादव और रामजी पासी को एनकाउंटर में मारा जा चुका है।
इसके अलावा शुक्रवार को पुलिस ने मुठभेड़ में इनामी बदमाश मुकेश राजभर को मार गिराया। अलग-अलग हुई 17 मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगने से 44 बदमाश घायल हुए हैं। सभी को गिरफ्तार किया जा चुका है। बदमाशों की गोली से 13 पुलिसवाले भी घायल हुए हैं।
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जिसके चलते आजमगढ़ में 36 दिनों के भीतर कुल 45 अपराधी जेल से बाहर आने की बजाय दूसरी जेलों में अपना स्थानांतरण करा लिया है। कई ने अपनी जमानत रद्द करवा ली। 45 अपराधियों में 15 गैंग लीडर शेष इनके गुर्गे, शूटर और सेवादार शामिल हैं।
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ये अपने मुखिया के पकड़े जाने के बाद उनकी सेवा करने के लिए जेल के भीतर गए थे। पुलिस ऐसे बदमाशों की सूची तैयार कर उनका आपराधिक डाटा उन जिलों की पुलिस को सौंपेगी, ताकि जेल बदलने का फायदा अपराधी न उठा पाए।
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अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस ने मार्च 2017 से अपराधियों के विरुद्ध खुली जंग छेड़ दी। पूर्वांचल में आतंक का पर्याय बने तीनों बदमाशों सुजीत सिंह बुढ़वा, जयहिंद यादव और रामजी पासी को एनकाउंटर में मारा जा चुका है।
इसके अलावा शुक्रवार को पुलिस ने मुठभेड़ में इनामी बदमाश मुकेश राजभर को मार गिराया। अलग-अलग हुई 17 मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगने से 44 बदमाश घायल हुए हैं। सभी को गिरफ्तार किया जा चुका है। बदमाशों की गोली से 13 पुलिसवाले भी घायल हुए हैं।
जेल से बाहर आने में डर रहे अपराधी
demo pic
सुजीत सिंह बुढ़वा रामपुर जिले से मऊ पेशी पर गया था। वापस रामपुर लौटते समय अतरौलिया बाजार में पुलिस अभिरक्षा से फरार हुआ था। इसके बाद पुलिस के भय के चलते ज्यादातर अपराधी अदालत में समर्पण कर जेल में चले गए। कई ने अपनी जमानत रद्द करवा ली।
आलम यह हुआ कि जेल में बंदियों की संख्या 1245 से अधिक पहुंच गई। ठंड के मौसम में इतने लोगों की व्यवस्था संभालने में जेल कर्मियों को पसीने छूट रहे थे। इसी बीच 18 दिसंबर को पेशी पर आया बदमाश मोहन पासी दीवानी न्यायालय से पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया।
मोहन की फरारी के पीछे पुलिस पर भी आरोप लगे। कहा जाने लगा कि फरारी के पीछे भी पुलिस है। घटना के बाद जेल में आराम फरमा रहे अपराधियों में भय उत्पन्न हो गया। उन्हें यह चिंता सताने लगी कि कहीं पुलिस किसी को भी पेशी के दौरान फरारी दिखाकर एनकाउंटर न कर दे।
इसी भय के चलते 36 दिनों के भीतर कुल 45 बदमाशों ने अपना दूसरी जेलों में ट्रांसफर करा लिया है। ताकि वहां की पुलिस को उनकी हिस्ट्री के विषय में पता नहीं चलेगा और वे चुपचाप जमानत पर बाहर निकलकर सुरक्षित ठिकानों पर पहुंच जाएंगे। जेल बदलने वालों में 15 गैंग लीडर और इनके गुर्गे, शूटर और सेवादार शामिल हैं।
आलम यह हुआ कि जेल में बंदियों की संख्या 1245 से अधिक पहुंच गई। ठंड के मौसम में इतने लोगों की व्यवस्था संभालने में जेल कर्मियों को पसीने छूट रहे थे। इसी बीच 18 दिसंबर को पेशी पर आया बदमाश मोहन पासी दीवानी न्यायालय से पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया।
मोहन की फरारी के पीछे पुलिस पर भी आरोप लगे। कहा जाने लगा कि फरारी के पीछे भी पुलिस है। घटना के बाद जेल में आराम फरमा रहे अपराधियों में भय उत्पन्न हो गया। उन्हें यह चिंता सताने लगी कि कहीं पुलिस किसी को भी पेशी के दौरान फरारी दिखाकर एनकाउंटर न कर दे।
इसी भय के चलते 36 दिनों के भीतर कुल 45 बदमाशों ने अपना दूसरी जेलों में ट्रांसफर करा लिया है। ताकि वहां की पुलिस को उनकी हिस्ट्री के विषय में पता नहीं चलेगा और वे चुपचाप जमानत पर बाहर निकलकर सुरक्षित ठिकानों पर पहुंच जाएंगे। जेल बदलने वालों में 15 गैंग लीडर और इनके गुर्गे, शूटर और सेवादार शामिल हैं।
बंदियों की संख्या अचानक बढ़ गई
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जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम का कहना है कि 18 दिसंबर से पहले जेल में अचानक बंदियों की संख्या बढ़कर 1245 से अधिक पहुंच गई थी। ठंड के मौसम में व्यवस्था संभालने में परेशानी हो रही थी। 18 दिसंबर के बाद से अब तक 297 बंदी रिहा और दूसरी जेलों में शिफ्ट हो जाने की वजह से जेल में 948 बंदी शेष हैं।
एसपी अजय कुमार साहनी ने बताया कि पुलिस के भय से कई बदमाश जहां अपनी जमानत रद्द करवा रहे हैं। वहीं कई जमानत के बाद भी जेल से बाहर नहीं निकल रहे। 15 गैंग लीडर सहित 45 बदमाश दूसरी जेलों में शिफ्ट हो चुके हैं। इनकी क्राइम हिस्ट्री तैयार कर उन जिला प्रशासन को भेजा जाएगा। जिस जेल में वे गए हैं। ताकि पुलिस अपने स्तर से इन पर नजर रख सके।
एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक पुलिस की भय से अमरजीत यादव, रामजीत यादव, बाले उर्फ बालेंद्र यादव, लालू यादव, जामवंत यादव, सचिन पांडेय सहित 15 गैंग लीडर और 30 इनके गिरोह के लोगों ने पहले तो अपनी जमानत रद्द करा ली है। इसके बाद दूसरे जिलों की जेल में अपना ट्रांसफर करा लिया।
ताकि उनके विषय में स्थानीय पुलिस को भनक तक न लगे और वे चोरी से बाहर निकलकर सुरक्षित ठिकानों पर भूमिगत हो सकें। एक बदमाश की मां न्यायालयों में अच्छी पकड़ रखती है। बदमाश उसके इस पहुंच का फायदा उठाकर आसानी से एक जेल से दूसरी जेल में पहुंच जाते हैं।
एसपी अजय कुमार साहनी ने बताया कि पुलिस के भय से कई बदमाश जहां अपनी जमानत रद्द करवा रहे हैं। वहीं कई जमानत के बाद भी जेल से बाहर नहीं निकल रहे। 15 गैंग लीडर सहित 45 बदमाश दूसरी जेलों में शिफ्ट हो चुके हैं। इनकी क्राइम हिस्ट्री तैयार कर उन जिला प्रशासन को भेजा जाएगा। जिस जेल में वे गए हैं। ताकि पुलिस अपने स्तर से इन पर नजर रख सके।
एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक पुलिस की भय से अमरजीत यादव, रामजीत यादव, बाले उर्फ बालेंद्र यादव, लालू यादव, जामवंत यादव, सचिन पांडेय सहित 15 गैंग लीडर और 30 इनके गिरोह के लोगों ने पहले तो अपनी जमानत रद्द करा ली है। इसके बाद दूसरे जिलों की जेल में अपना ट्रांसफर करा लिया।
ताकि उनके विषय में स्थानीय पुलिस को भनक तक न लगे और वे चोरी से बाहर निकलकर सुरक्षित ठिकानों पर भूमिगत हो सकें। एक बदमाश की मां न्यायालयों में अच्छी पकड़ रखती है। बदमाश उसके इस पहुंच का फायदा उठाकर आसानी से एक जेल से दूसरी जेल में पहुंच जाते हैं।