यूपी पुलिस को बड़ी कामयाबी: चिकित्सकों से रंगदारी वसूलने का आरोपी अजय गिरफ्तार, चार साल से था भूमिगत
Varanasi News: वाराणसी जिले की पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मंगलवार को दुर्दांत अपराधी अजय उर्फ विजय को पुलिस ने सारनाथ से गिरफ्तार किया है। यूपी व बिहार की पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी।
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हत्या, लूट और रंगदारी के आरोपी अजय उर्फ विजय सिंह को सारनाथ पुलिस ने आर्म्स एक्ट में मंगलवार को सिंहपुर अंडरपास से गिरफ्तार किया। आरोपी के कब्जे से तमंचा और चोरी की बाइक, फर्जी आधार कार्ड मिला। फतेहपुर के खागा थाना क्षेत्र के पूरइन छिनी निवासी अजय उर्फ विजय सिंह उर्फ मिंटू के खिलाफ वाराणसी में हत्या, रंगदारी, गैंगस्टर समेत 21 और गाजीपुर में रंगदारी, हत्या के आरोप में एक केस दर्ज है। चार साल से वह पुलिस को चकमा देकर भूमिगत था। अजय की गिरफ्तारी के बाद गाजीपुर, चंदौली की एसओजी के अलावा बिहार पुलिस ने भी कमिश्नरेट पुलिस से संपर्क साधा है।
एसीपी सारनाथ विदुष सक्सेना ने बताया कि चार साल से उसकी लोकेशन नहीं मिल रही थी। सारनाथ थाना प्रभारी पंकज कुमार त्रिपाठी को सूचना मिली कि सिंहपुर अंडरपास के पास बाइक सवार असलहा लेकर किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में है। क्राइम टीम ने अजय को पकड़ लिया। पूछताछ में बताया कि फर्जी आधार कार्ड के जरिये वह पहचान छिपाकर किराये का कमरा लेकर रहता था।
थाना प्रभारी पंकज त्रिपाठी ने बताया कि अजय ने सरकारी चिकित्सक की हत्या से जरायम जगत में कदम रखा। 13 सितंबर 2007 में पहली बार पांडेयपुर के सरकारी चिकित्सक डॉ. डीपी सिंह की गोली मारकर हत्या में शूटर के तौर पर अजय विजय का नाम सामने आया था। 2007 से 2014 तक वाराणसी में छह हत्याएं और छह हत्या के प्रयास, रंगदारी, लूट, अपहरण को अंजाम दिया। 2012 में ही गाजीपुर के सराफ व्यवसायी भाइयों को लूट के इरादे से गोली मारकर हत्या में भी नामजद रहा है। लखनऊ के प्रापॅर्टी डीलर और टीटीई विजय सिंह की गोली मारकर हत्या के प्रयास में भी नामजद था।
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पूर्वांचल में सुपारी लेकर हत्या और रंगदारी वसूलने में है कुख्यात
पूर्वांचल में पिछले एक दशक के अपराध का पन्ना पलटे तो वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर और चंदौली समेत पूर्वांचल में अजय विजय का अलग ही खौफ रहा है। सुपारी लेकर हत्या और रंगदारी वसूलने के लिए कुख्यात अजय विजय से सराफा व्यवसायी, ठेकेदार और चिकित्सक काफी खौफ खाते थे। नाम सुनकर ही लोग रंगदारी पहुंचा देते थे।
चिकित्सक डीपी सिंह की हत्या से ही अपराध जगत में अजय विजय का नाम पूर्वांचल से बोलने लगा था। 20 साल की उम्र में पहली हत्या अजय ने की। पश्चिम और बिहार में भी अजय विजय सुपारी लेकर हत्या, अपहरण जैसे वारदात को अंजाम देता रहा है। 2022 में गुपचुप तरीके से चंदौली में सरेंडर करने वाला अजय विजय जमानत पर छूटा तो फिर कभी भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका।
चंदौली एसओजी ने भी दवा व्यवसायी रोहितास पाल हत्या कांड में अजय विजय से पूछताछ की है, लेकिन कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिल सका है। 2013 में 50 हजार के इनामी अजय विजय को कैंट पुलिस ने एक चिकित्सक से रंगदारी वसूलने के फिराक में पिस्टल के साथ गिरफ्तार किया था। वाराणसी और बांदा जेल में बंद रहते हुए अजय विजय ने पूर्वांचल में नए लड़कों का एक अलग गैंग तैयार किया था, जिनका काम रंगदारी वसूलना था।
माशूका के साथ किराये पर रहता था
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अजय विजय को पकड़ना आसान नहीं था। वह 15 दिनों से सारनाथ थाना क्षेत्र में सक्रिय था। कमिश्नरेट एअसोजी को भनक तक नहीं लग सकी। माशूका के साथ वह किराये के मकान में रहता था। गाजीपुर को अपना मूल ठिकाना बनाए अजय विजय की लोकेशन सारनाथ में मिलते ही पुलिस ने उसे दबोच लिया।