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वाराणसी: फर्जी डिग्री से 4 साल चलाया अस्पताल, डॉ. जितेंद्र की प्रैक्टिस बंद; रिकॉर्ड न होने से उठे सवाल

Sat, 31 Oct 2026 08:46 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sat, 31 Oct 2026 08:46 AM IST
सार

फर्जी डिग्री के आधार पर चार साल तक अस्पताल संचालित करने के आरोप में डॉ. जितेंद्र की प्रैक्टिस बंद करा दी गई है। जांच में क्षेत्रीय आयुर्वेद कार्यालय में उनकी डिग्री और संबंधित अभिलेखों का रिकॉर्ड नहीं मिला। इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था और निजी अस्पतालों के पंजीकरण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Varanasi Hospital run fake degree Jitendra practice shut down lack records raises questions about system
फर्जीवाड़े का पर्दाफाश। - फोटो : istock

विस्तार

फर्जी डिग्री के जरिये मरीजों का इलाज करने वाले डॉ. जितेंद्र चक्रवाल की प्रैक्टिस पर शासन ने तत्काल रोक लगा दी है। प्रदेश स्तर पर आयुर्वेदिक, यूनानी तिब्बती चिकित्सा पद्धति बोर्ड द्वारा 19 फर्जी डॉक्टरों का पंजीयन रद किए जाने के बाद, इसमें शिवदासपुर निवासी डॉ. जितेंद्र चक्रवाल का नाम भी शामिल पाया गया है। आयुर्वेद निदेशालय ने उनके किसी भी प्रकार के चिकित्सीय परामर्श और इलाज करने पर पूर्ण रोक लगा दी है।

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इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि स्थानीय क्षेत्रीय आयुर्वेद अधिकारी के पास आरोपी का कोई प्राथमिक आधिकारिक रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है। जांच के अनुसार, आरोपी पिछले चार वर्षों से बाकायदा एक अस्पताल खोलकर मरीजों का उपचार कर रहा था और उन्हें दवाइयां दे रहा था। यह पूरा अस्पताल और चिकित्सीय कार्य फर्जी डिग्री के आधार पर हासिल किए गए पंजीकरण के सहारे बेरोकटोक संचालित किया जा रहा था। बोर्ड द्वारा कराए गए अंतरराज्यीय सत्यापन में जब संबंधित संस्थान ने डिग्री को फर्जी करार दिया, तब जाकर इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ।

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दस्तावेज के अनुसार, आरोपी ने वर्ष 2021-22 में जाली प्रमाण पत्रों के दम पर बोर्ड में पंजीयन कराया था। इसके तुरंत बाद उसने शिवदासपुर क्षेत्र में अपना अस्पताल शुरू कर दिया और पिछले चार वर्षों से नियमित रूप से ओपीडी चलाकर मरीजों को दवाएं बांट रहा था। 

आयुर्वेद निदेशालय, लखनऊ ने वाराणसी के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी को औपचारिक पत्र भेजकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि डॉ. जितेंद्र चक्रवाल यदि जिले में कहीं भी क्लीनिक या अस्पताल संचालित कर रहे हैं, तो तत्काल प्रभाव से उसका लाइसेंस रद कर विधिक कार्रवाई की जाए। साथ ही, उनके मरीजों का इलाज करने पर तत्काल रोक सुनिश्चित की जाए। इसके बावजूद, स्थानीय स्तर पर आरोपी का रिकॉर्ड न मिलने से विभागीय मॉनिटरिंग और निजी क्लिनिकों के जमीनी सत्यापन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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आरोपी का कोई भी रिकॉर्ड हमारे पास मौजूद नहीं है। शासन से लिखित आदेश आने का इंतजार है। आदेश के बाद आगे की कार्रवाई होगी। - डॉ. अरविंद सिंह, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी

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