{"_id":"599041354f1c1b07088b491b","slug":"shia-sunni-tension-between-burying-dead-body-in-mau","type":"story","status":"publish","title_hn":"मऊ में शव दफनाने पर शिया-सुन्नी के बीच तनाव","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मऊ में शव दफनाने पर शिया-सुन्नी के बीच तनाव
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Sun, 13 Aug 2017 08:04 PM IST
विज्ञापन
विवाद के बाद मौके जमा लोग और पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी के मऊ जिले में रहमत नगर स्थित कब्रिस्तान में रविवार को शव दफनाने को लेकर शिया और सुन्नी समुदाय के लोग आमने सामने हो गए। विवाद की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। पुलिस ने दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले का हल निकाला।
विज्ञापन
इस दौरान छह घंटे बाद शव को दफनाया जा सका। शव दफनाए जाने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली। कोपागंज बाजार स्थित वाजिदपुरा मोहल्ले के शिया समुदाय के भाजपा नेता पूर्व सभासद जऊवार भारती की 75 वर्षीय पत्नी रिजवाना की शनिवार की रात बीमारी के दौरान मौत हो गई।
विज्ञापन
इस दौरान परिवार के लोगों ने मोहल्ले से सटे शिवपुर गाड़ा गांव के रहमत नगर स्थित कब्रिस्तान में शव दफनाने के लिए रविवार की सुबह कब्र खोदने का कार्य शुरू किए। तभी सुन्नी समुदाय के लोग वहां पहुंचकर विरोध किए। सुन्नी समुदाय के लोगों का कहना था कि दूसरे स्थान पर कब्र खोदकर दव दफनाया जाए।
विज्ञापन
इसको लेकर दोनों समुदाय के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। देखते ही देखते दोनों वर्ग के सैकड़ों लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस प्रशासन के हाथ पांव फूल गए।
थानाध्यक्ष कोपागंज ने इसकी सूचना उपजिलाधिकारी सदर डा. राजेश कुमार, सीओ घोसी अरशद जमाल सिद्दीकी,तहसीलदार सदर मिथिलेश त्रिपाठी, सहित अन्य उच्चाधिकारियों को दिया। इस पर एसडीएम, सीओ के साथ-साथ नायब तहसीलदार शशिभूषण पाठक, राजस्व निरीक्षक विजेंद्र प्रताप सिंह के साथ कई थाने की पुलिस मौके पर पहुंची।
प्रशासनिक अधिकारी दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले का हाल निकालने में जुटें। इस दौरान मौके पर बाजार निवासी और भाजपा जिलामंत्री अखिलेश तिवारी भी वहां पहुंच गए। आपसी बातचीत करने के बाद छह घंटे बाद तय हुआ कि शव को थोड़ी दूर पर दफ़नाया जाए। आपसी सहमति पर शव दफनाया गया, इसके बाद सभी ने राहत की सांस लिया।