लंका चौराहे पर सभा कर रहे जेएनयू के छात्रों पर पथराव
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मंगलवार को सिंह द्वार पर छात्र संगठन आइसा ने छात्र युवा सम्मेलन का आयोजन किया था। इसमें जेएनयू छात्रसंघ के पदाधिकारी भी शामिल हुए। इसमें जेएनयू छात्र संघ उपाध्यक्ष शेहला राशिद, महासचिव रामा नागा, पूर्व उपाध्यक्ष अनंत प्रकाश नारायण सभी मौजूद थे। मुद्दा बीएचयू में 24 घंटे साइबर लाइब्रेरी और निलंबन छात्रों की कार्रवाई वापस लेने की मांग का था। शाम चार बजे जब आइसा का सम्मेलन शुरू हुआ, एबीवीपी के कुछ छात्र वहां पहुंच गए। एक ओर जहां लाल सलाम का नारा बुलंद हो रहा था, वहीं दूसरी ओर एबीवीपी के छात्र भारत माता की जय का नारा लगा रहे थे। कई थानों की फोर्स, पीएसी और बीएचयू प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम पहले से यहां मौजूद थी।
बिना इजाजत बीच सड़क सभा करने पर पुलिस ने आइसा के लोगों को वहां से हटाने की कोशिश की। इस पर छात्रनेताओं की एडीएम सिटी विंध्यवासिनी राय और एसपी सिटी सुधाकर यादव से जबरदस्त बहस हो गई। प्रशासन का कहना था कि शहर में धारा 144 लागू है और सभा के लिए इजाजत भी नहीं ली गई थी। उधर, एबीवीपी से जुड़े छात्र भी आइसा वहां से हटाने की जिद पर अड़े थे। जब सभा कर रहे छात्र हटने को राजी नहीं हुए, एबीवीपी के छात्रों ने उन पर पथराव शुरू कर दिया। इससे भगदड़ जैसे हालात बन गए और दवा की दुकानों पर पथराव किया जाने लगा।
मौके की नजाकत को देखते हुए पुलिस ने एक ओर एबीवीपी के छात्रों को रोकने की कोशिश की, वहीं जेएनयू के छात्रों को भी खदेड़ दिया। इसी दौरान सभास्थल को भी तहस-नहस कर दिया गया। जेएनयू छात्रसंघ उपाध्यक्ष शेेहला राशिद का आरोप है कि एक महिला पुलिसकर्मी ने उन्हें वहां से हटाने के दौरान बदतमीजी की। पुलिस द्वारा खदेड़े जाने के बाद सम्मेलन में जुटे लोग जुलूस की शक्ल में अस्सी की ओर बढ़ गए।