सोनभद्र : पीड़ितों से मिले माकपा नेता, योगी सरकार को ठहराया जिम्मेदार
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात ने सोनभद्र के उभ्भा में हुए खूनी संघर्ष के लिए भाजपा सरकार की नीति को जिम्मेदार ठहराया है। कानपुर की पूर्व सांसद एवं पोलित ब्यूरो सदस्य सुभाषिनी अली के साथ मंगलवार को उभ्भा गांव का दौरा करने के बाद हर एक मृतक आश्रित को 25 लाख और हर एक घायल को 10 लाख मुआवजा और जमीन का पट्टा दिए जाने की मांग की।
आदिवासियों को सुरक्षा की गारंटी देने की मांग करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य की वर्तमान सरकार पूरी तरह आदिवासी दलित, गरीब और अल्पसंख्यक विरोधी है। इस सरकार में दबंग, सामंत, भू- माफिया, भ्रष्ट नौकरशाह फल-फूल रहे हैं।गत 17 जुलाई को दस आदिवासियों की हत्या इसी का परिणाम है।
सुभाषिनी अली ने कहा कि सोनभद्र और मिर्जापुर सैकड़ों भू- माफिया, बाबा, अधिकारी लाखों एकड़ जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा जमाए बैठे हैं। आदिवासियों, वनवासियों को उनकी पुश्तैनी जमीन से बेदखल किया जा रहा है।
प्रशासन इन भू- माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही ना करके आदिवासियों को ही उनकी जमीन से बेदखल करता है, मुकदमे में फंसाता है। वनाधिकार कानून को शासन ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि उभ्भा कांड के पीड़ितों के साथ पूरी माकपा खड़ी है। उनके साथ किसी भी तरह का अन्याय, शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इससे पहले वृंदा करात और सुभाषिनी अली पार्टी नेताओं के साथ सुबह साढ़े 11 बजे उभ्भा गांव पहुंची। वहां वह डेढ़ घंटे तक रहीं। प्राथमिक विद्यालय के पास और घर जाकर मृतक के परिजनों, घायलों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली। शासन से मिलने वाली सहायता के बारे में भी जानकारी की।
इस दौरान मृतक रामसुंदर की पत्नी सीता, मृतक अशोक की पत्नी लालदेई आदि ने अपना दर्द बयां किया। यहां के बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया। रामपति, कैलाश, रामलाल आदि ने बताया कि 17 जुलाई को जिस जमीन को लेकर गोलीकांड हुआ, उसे वे लोग पिता-दादा के जमाने से तीन पीढ़ियों से जोत कोड़ रहे हैं।
पीड़ितों ने बताया कि प्रधान पक्ष के सैकड़ों लोग 32 ट्रैक्टर और असलहों के बल पर जमीन कब्जा कर रहे थे, जिसका गोंड़ समुदाय के लोगों ने विरोध किया। इस पर प्रधान पक्ष के लोगों ने अंधाधुंध फायरिंग कर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इसमें 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन लोग घायल हो गए।