{"_id":"5c9e7c4dbdec22144b7efed6","slug":"61553890381-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अवैध कनेक्शन भी बढ़ा रहे जलकल की मुश्किलें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अवैध कनेक्शन भी बढ़ा रहे जलकल की मुश्किलें
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। शहर में बड़ी मात्रा में अवैध कनेक्शन हैं, जो पेयजल की दुर्व्यवस्था का एक मुख्य कारण हैं। जलकल विभाग की सालाना आय 36 करोड़ रुपये है, जो वेतन और मानदेय में खर्च हो जाती है। जबकि विभाग चाहे तो अपनी आय को आसानी से बढ़ा सकता है। इसके लिए विभाग को फिर से सर्वे कराने की जरूरत है, जिससे आसानी से अवैध कनेक्शनों को ट्रेस करके उनकी बिलिंग कर सकता है। पूरे शहर में देखा जाए तो 25 से 30 प्रतिशत कनेक्शन अवैध हैं अगर इनसे वसूली हो तो विभाग को पांच करोड़ की अतिरिक्त आय हो सकती है।
घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लोग ठेकेदार और प्लंबर से मिलकर कनेक्शन ले लेते हैं। घनी बस्ती और जमीन के अंदर होने के चलते विभाग के कर्मचारी जांच में भी इन्हें नहीं पकड़ पाते हैं, जिसका फायदा लोकल दलाल उठाते हैं। इसकी जानकारी अगर जलकल के कर्मचारियों को होती है, तो वो भी साठगांठ कर लेते हैं।
अवैध कनेक्शन से विभाग को राजस्व का नुकसान तो है ही साथ ही विभाग के कागजों में दर्ज न होने के कारण विभाग को अंदाजा भी नहीं होता कि किस क्षेत्र में कितना पानी चाहिए। जस मानक के आधार पर विभाग पानी छोड़ता है उसके हिसाब से लोगों को पेयजल उपलब्ध नहीं हो पाता है।
विज्ञापन
नगर निगम ने हाल ही में जो आंकड़े जारी किए हैं। उस आंकड़े के अनुसार 1.98 लाख भवनों की बिलिंग नगर निगम करता है। जबकि जलकल मात्र 1.53 लाख भवनों को ही पानी का बिल दे पाता है। ऐसे में जलकल के आंकड़ों के अनुसार 45 हजार घरों में कोई कनेक्शन नहीं है।
विज्ञापन
घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लोग ठेकेदार और प्लंबर से मिलकर कनेक्शन ले लेते हैं। घनी बस्ती और जमीन के अंदर होने के चलते विभाग के कर्मचारी जांच में भी इन्हें नहीं पकड़ पाते हैं, जिसका फायदा लोकल दलाल उठाते हैं। इसकी जानकारी अगर जलकल के कर्मचारियों को होती है, तो वो भी साठगांठ कर लेते हैं।
विज्ञापन
अवैध कनेक्शन से विभाग को राजस्व का नुकसान तो है ही साथ ही विभाग के कागजों में दर्ज न होने के कारण विभाग को अंदाजा भी नहीं होता कि किस क्षेत्र में कितना पानी चाहिए। जस मानक के आधार पर विभाग पानी छोड़ता है उसके हिसाब से लोगों को पेयजल उपलब्ध नहीं हो पाता है।
विज्ञापन
नगर निगम ने हाल ही में जो आंकड़े जारी किए हैं। उस आंकड़े के अनुसार 1.98 लाख भवनों की बिलिंग नगर निगम करता है। जबकि जलकल मात्र 1.53 लाख भवनों को ही पानी का बिल दे पाता है। ऐसे में जलकल के आंकड़ों के अनुसार 45 हजार घरों में कोई कनेक्शन नहीं है।