फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   पिता की विरासत पर मजबूत होगी दावेदारी

पिता की विरासत पर मजबूत होगी दावेदारी

Mon, 25 Mar 2019 01:38 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 25 Mar 2019 01:38 AM IST
विज्ञापन
पिता की विरासत पर मजबूत होगी दावेदारी
वाराणसी। सपा से पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आजमगढ़ से चुनाव मैदान में उतरने की वजह सीट को परिवार के पास रखना ही नहीं बल्कि पूर्वांचल में अपनी सियासी स्थिति और बेहतर करने का अवसर है। 2014 में वाराणसी से नरेंद्र मोदी के मुकाबले पूर्वांचल की लड़ाई को चर्चा में रखने के लिए मुलायम सिंह यादव मैनपुरी के साथ-साथ इस सीट से चुनाव लड़े थे। मोदी लहर में मुलायम ने आजमगढ़ में जीत भी हासिल कर ली थी पर जिले और गाजीपुर, बलिया सीट के अलावा सपा उम्मीदवारों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। लालगंज में सपा के बेचई सरोज, बलिया में नीरज शेखर और गाजीपुर में शिवकन्या कुशवाहा ही दूसरे स्थान पर रही थी। दूसरी ओर क्षेत्र से बसपा के किसी बड़े नेता के चुनाव न लड़ने के बाद भी पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी। घोसी से दारा सिंह चौहान, जौनपुर से सुभाष पांडे, चंदौली से अनिल मौर्य दो नंबर पर रहे थे।
विज्ञापन

इस चुनाव में गठबंधन के बाद अखिलेश के लिए यह इसलिए भी जरूरी हो गया है, क्योंकि इस इलाके में उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव का भी प्रभाव माना जा रहा है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अखिलेश आजमगढ़ के चुनावी मुकाबले को ही चर्चित नहीं बनाएंगे, बल्कि विधानसभा चुनाव लड़े बगैर मुख्यमंत्री बनने के समय उठे सवालों का भी जवाब दे सकेंगे। यही नहीं, पूर्वांचल में गठबंधन खासतौर पर सपा को जो भी सीटें मिलेंगी, उनमें उनका योगदान महत्वपूर्ण हो जाएगा। वाराणसी, मिर्जापुर और आजमगढ़ मंडल की 12 सीटों में से मिज़ार्पुर, भदोही, रॉबर्ट्सगंज और मछलीशहर में भी बसपा प्रत्याशी ही दूसरे स्थान पर रहे थे। इन्हीं परिणामों के आधार पर 2017 के विधानसभा चुनाव के नतीजों का आकलन किया जा रहा था। अब अखिलेश उस अवसर का लाभ ले सकते हैं
विज्ञापन

कहा जा रहा है कि यदि अखिलेश आजमगढ़ से सांसद चुन लिए गए तो उनका विरोध करने वाले उनके चाचा शिवपाल और अंकल अमर सिंह भी कुछ दिन चुप्पी साधने को मजबूर हो जाएंगे। सपा द्वारा दोबारा पार्टी से निकाले जाने के बाद अमर सिंह अखिलेश पर लगातार टिप्पणियों के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुणगान करते रहे हैं। पार्टी के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए 2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश के नेतृत्व में मैदान में उतरने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed