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जेवीएल के सात कर्मचारी बर्खास्त
Updated Wed, 07 Feb 2018 12:52 AM IST
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थानागद्दी। झूला वनस्पति कंपनी प्रबंधन ने मंगलवार को अवैध तरीके से हड़ताल करने एवं श्रमिकों को बरगलाकर उत्पादन रोकने, कंपनी को क्षति पहुंचाने का आरोप लगाते हुए सात कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया। बर्खास्तगी की नोटिस चस्पा होते ही हड़ताली कर्मचारी उग्र हो गए। कोतवाल शशि भूषण राय मौके पर पहुंचकर समझौते का प्रयास किए पर बात किसी नतीजे पर नही पहुंचीं लगातार 72 घंटे से चल रही हड़ताल के कारण उत्पादन पूरी तरह प्रभावित रहा।
केराकत कोतवाली के नाऊपुर स्थित जेवीएल एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड के एचआर और प्रशासन महाप्रबंधक अजय सिंह ने कर्मचारी नेता संतोष शुक्ल, देवेंद्र सिंह, शक्ति नारायण सिंह, मनोज विश्वकर्मा, धर्मेंद्र सिंह, विराट सिंह एवं बृजेश सिंह को कंपनी की सेवा से बर्खास्त कर दिया। कर्मचारियों ने मंगलवार को भी कंपनी की चिमनी से धुआं नहीं निकलने दिया। कंपनी की कार्रवाई एवं अड़ियल रवैये से नाखुश कर्मियों ने मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी। मजदूर नेता संतोष शुक्ल एवं देवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि कंपनी प्रबंधन हमें संगीन अपराधों में फंसाने एवं पिटवाने की धमकी दे रहा है। उधर कंपनी प्रबन्धन का कहना है कि आए दिन गलत तरीके से उत्पादन ठप करवाने से कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उचित मांगें मान ली गई है। अनुचित और अनावश्यक मांगें पूरा करने में कंपनी असमर्थ है। शांतिपूर्वक कंपनी संचालन एवं श्रमिकों के हित में सात कर्मियों को सेवामुक्त कर दिया गया है।
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केराकत कोतवाली के नाऊपुर स्थित जेवीएल एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड के एचआर और प्रशासन महाप्रबंधक अजय सिंह ने कर्मचारी नेता संतोष शुक्ल, देवेंद्र सिंह, शक्ति नारायण सिंह, मनोज विश्वकर्मा, धर्मेंद्र सिंह, विराट सिंह एवं बृजेश सिंह को कंपनी की सेवा से बर्खास्त कर दिया। कर्मचारियों ने मंगलवार को भी कंपनी की चिमनी से धुआं नहीं निकलने दिया। कंपनी की कार्रवाई एवं अड़ियल रवैये से नाखुश कर्मियों ने मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी। मजदूर नेता संतोष शुक्ल एवं देवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि कंपनी प्रबंधन हमें संगीन अपराधों में फंसाने एवं पिटवाने की धमकी दे रहा है। उधर कंपनी प्रबन्धन का कहना है कि आए दिन गलत तरीके से उत्पादन ठप करवाने से कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उचित मांगें मान ली गई है। अनुचित और अनावश्यक मांगें पूरा करने में कंपनी असमर्थ है। शांतिपूर्वक कंपनी संचालन एवं श्रमिकों के हित में सात कर्मियों को सेवामुक्त कर दिया गया है।
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