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एनएच और राजस्व विभाग की मिलीभगत से गलत खाते में भेजा मुआवजा
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वाराणसी। रिंग रोड-2 के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के मुआवजे में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राजस्व विभाग की मिलीभगत से सरकारी धन का बंदरबाट किया जा रहा है। नरपतपुर में अधिग्रहित जमीन का मुआवजा गांव के एक व्यक्ति और उसके चार बेटों को दे दिया, जबकि जमीन के असली मालिक को मुआवजे का 15 फीसदी हिस्सा ही मिला। लगातार शिकायतों के बाद पूरे मामले की जांच हुई तो यह गड़बड़ी सामने आई और मुआवजा राशि वापस लेने के लिए अधिकारी लगातार मशक्कत कर रहे हैं।
जाल्हूपुर के नरपतपुर निवासी शोभनाथ और खरभन की जमीन रिंग रोड-2 के लिए अधिग्रहित की गई। इसी में मिलीभगत कर सत्यनारायण ने भी अपनी जमीन के अधिग्रहण होने का दावा कर मुआवजे की मांग की। प्रशासन की ओर से सत्यनारायण के खाते में 13 लाख 51 हजार 105 और उसके बेटे अरविंद, अनिल और विजय के खाते में पांच लाख 63 हजार 520 रुपये जारी कर दिए गए। सत्यनारायण के सबसे छोटे पुत्र के खाते में 5 लाख 63 हजार 520 और चार लाख 50 हजार 369 रुपये दिए गए। यह जमीन और उस पर बने भवन के मुआवजे की राशि में दिया गया। इस मामले में मुआवजा नहीं मिलने से पीड़ित शोभनाथ ने इसकी शिकायत की तो मामले का खुलासा हुआ। जांच कराई गई तो सामने आया कि शोभनाथ को महज चार लाख 82 हजार 979 रुपये का मुआवजा मिला, जबकि सत्यनारायण और उसके बेटों को मिले मुआवजे पर भी उसका ही अधिकार है। इस मामले में अपर जिलाधिकारी प्रशासन के न्यायालय ने सत्यनारायण और उसके बेटों को मुआवजे की राशि लौटाने का नोटिस जारी किया है। नोटिस मिलने के बाद सत्यनारायण के पुत्र अरविंद कुमार ने अपने हिस्से का मुआवजा वापस कर दिया, मगर बाकी लोगों ने इससे इनकार कर दिया। बुधवार को शोभनाथ के जिलाधिकारी की कार के नीचे लेटकर प्रदर्शन करने के बाद अधिकारी हरकत में आए। अपर जिलाधिकारी प्रशासन राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि गलत तथ्यों के कारण सत्यनारायण और उसके बेटों को मुआवजे की राशि जारी की गई थी। उनसे रिकवरी कराकर दोषियों पर कार्रवाई होगी।
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जाल्हूपुर के नरपतपुर निवासी शोभनाथ और खरभन की जमीन रिंग रोड-2 के लिए अधिग्रहित की गई। इसी में मिलीभगत कर सत्यनारायण ने भी अपनी जमीन के अधिग्रहण होने का दावा कर मुआवजे की मांग की। प्रशासन की ओर से सत्यनारायण के खाते में 13 लाख 51 हजार 105 और उसके बेटे अरविंद, अनिल और विजय के खाते में पांच लाख 63 हजार 520 रुपये जारी कर दिए गए। सत्यनारायण के सबसे छोटे पुत्र के खाते में 5 लाख 63 हजार 520 और चार लाख 50 हजार 369 रुपये दिए गए। यह जमीन और उस पर बने भवन के मुआवजे की राशि में दिया गया। इस मामले में मुआवजा नहीं मिलने से पीड़ित शोभनाथ ने इसकी शिकायत की तो मामले का खुलासा हुआ। जांच कराई गई तो सामने आया कि शोभनाथ को महज चार लाख 82 हजार 979 रुपये का मुआवजा मिला, जबकि सत्यनारायण और उसके बेटों को मिले मुआवजे पर भी उसका ही अधिकार है। इस मामले में अपर जिलाधिकारी प्रशासन के न्यायालय ने सत्यनारायण और उसके बेटों को मुआवजे की राशि लौटाने का नोटिस जारी किया है। नोटिस मिलने के बाद सत्यनारायण के पुत्र अरविंद कुमार ने अपने हिस्से का मुआवजा वापस कर दिया, मगर बाकी लोगों ने इससे इनकार कर दिया। बुधवार को शोभनाथ के जिलाधिकारी की कार के नीचे लेटकर प्रदर्शन करने के बाद अधिकारी हरकत में आए। अपर जिलाधिकारी प्रशासन राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि गलत तथ्यों के कारण सत्यनारायण और उसके बेटों को मुआवजे की राशि जारी की गई थी। उनसे रिकवरी कराकर दोषियों पर कार्रवाई होगी।
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