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Varanasi: ज्ञानवापी के सभी मामलों की सुनवाई एक साथ करने पर एक मार्च को आएगा फैसला

Wed, 22 Feb 2023 10:47 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Wed, 22 Feb 2023 10:47 PM IST
सार

 ज्ञानवापी परिसर से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई एक साथ किए जाने की मांग वाली याचिकाओं पर बुधवार को जिला जज डॉ अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने सुनवाई की।दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पत्रावली सुरक्षित कर ली। 

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Court verdict will come on 1  March on hearing all cases of Gyanvapi case together
ज्ञानवापी परिसर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी परिसर से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई एक साथ किए जाने की मांग वाली याचिकाओं पर एक मार्च को फैसला आ सकता है। इस मामले में बुधवार को जिला जज डॉ अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने सुनवाई की है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पत्रावली सुरक्षित कर ली और फैसला सुनाने की तिथि एक मार्च निर्धारित कर दी।  

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श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और अन्य विग्रहों के संरक्षण की मांग को लेकर चार महिलाओं ने याचिका दाखिल की है। महिलाओं की मांग है कि ज्ञानवापी के सभी मामलों की सुनवाई एक साथ की जानी चाहिए। लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक के अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी, सुधीर त्रिपाठी ने मामलों की सुनवाई एक साथ किए जाने के पक्ष में अपनी बात रखी।

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राखी सिंह ने किया विरोध 

अधिवक्ताओं ने कहा कि ज्ञानवापी के सभी मामले एक जैसे हैं। इनकी अलग-अलग सुनवाई नहीं हो चाहिए। हालांकि, श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन व अन्य विग्रहों के संरक्षण से संबंधित याचिका से जुड़ी एक अन्य महिला राखी सिंह ने इसका विरोध किया। उनके अधिवक्ता ने कहा कि वह सभी मामलों की सुनवाई एक साथ नहीं चाहती हैं।

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Court verdict will come on 1  March on hearing all cases of Gyanvapi case together
वाराणसी कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

इसी तरह ज्ञानवापी परिसर मेें दूसरे समुदाय के लोगों का प्रवेश रोकने की मांग से संबंधित याचिका दाखिल करने वाली किरण सिंह, विश्व हिंदू सनातन संघ के संस्थापक जितेंद्र सिंह बिसेन की ओर से अधिवक्ता शिवम गौड़ ने सभी मामलों की सुनवाई अलग-अलग किए जाने के पक्ष में दलील दी।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से अधिवक्ता रमेश उपाध्याय व जन उद्घोष समिति के वादी कुलदीप तिवारी की तरफ से भी मामले की सुनवाई अलग-अलग किए जाने की मांग की गई। ज्ञानवापी के ज्यादातर मामलों में प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से अधिवक्ता रईस अहमद ने भी आपत्ति जताई।

इसी तरह से शासन की तरफ से विशेष अधिवक्ता राजेश मिश्र ने न्यायोचित आदेश पारित करने का अनुरोध किया। अदालत ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद आदेश के लिए पत्रावली सुरक्षित रख ली है। 

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