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कोर्ट की खबरें: पॉक्सो मामले में दोषी को तीन साल की सजा, 15 हजार जुर्माना; संपत्ति हड़पने में जमानत खारिज

Thu, 03 Sep 2026 04:18 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Thu, 03 Sep 2026 04:18 PM IST
सार

पॉक्सो मामले में दोषी को तीन साल की सजा हुई। अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

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Court News of Convict in POCSO case sentenced to three years fined ₹15,000 bail rejected in property grabbing
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छेड़खानी और पॉक्सो एक्ट के मामले में अदालत ने आरोपी आशीष उर्फ गोलू को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट-06 की अदालत ने बुधवार को मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी पर कुल 15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।

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अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी को निर्धारित सजा के तहत जेल भेजे जाने की कार्रवाई की गई। मामला जैतपुरा थाना क्षेत्र का है। वर्ष 2020 में पीड़िता की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर जैतपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।  

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फर्जी वसीयत से करोड़ों की संपत्ति हड़पने के आरोप में अग्रिम जमानत खारिज
फर्जी वसीयत और करोड़ों रुपये की संपत्ति हड़पने के मामले में वाराणसी की अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या-4) सर्वजीत कुमार सिंह की अदालत ने आरोपी महेंद्र पश्तुरे की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की प्रकृति को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया। मामला लालपुर-पांडेयपुर थाने में दर्ज है।

वादी विपिन कुमार पांडेय के अनुसार, आरोपी की पत्नी का 10 फरवरी 2025 को लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया था। आरोप है कि उनकी मौत के बाद नवजात शिशु के संरक्षण और मृतका की करोड़ों रुपये की संपत्ति पर अधिकार हासिल करने के उद्देश्य से फर्जी और कूटरचित वसीयत तैयार की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बैंक खातों, बीमा पॉलिसियों और अन्य संपत्तियों पर कब्जा करने की मंशा से वसीयत तैयार की गई। इतना ही नहीं, वसीयत के गवाहों के फर्जी हस्ताक्षर कराए जाने का भी आरोप है। मामले में अदालत ने आरोपों की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया।
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