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कोर्ट का आदेश : लाखों रुपये कमा रही पत्नी भरण-पोषण की अधिकारी नहीं

Wed, 05 Sep 2018 10:28 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Wed, 05 Sep 2018 10:28 AM IST
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court grants order that wife would not get maintenance if she earning lakhs of rupees
अदालत ने पत्नी की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया आदेश, तलाक की याचिका मंजूर
 लाखों रुपये कमा रही पत्नी भरण-पोषण के लिए खर्च पाने की अधिकारी नहीं है। यह आदेश पारिवारिक न्यायालय की न्यायाधीश कुमारी रिंकू ने पत्नी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। अदालत ने वादिनी के दोनों बच्चों को पांच-पांच हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश पति को दिया है। यह रकम लड़के के बालिग होने और लड़की की शादी होने तक दी जाएगी। अदालत ने पत्नी की तलाक याचिका को मंजूर करते हुए पति से अलग रहने की इजाजत दे दी।
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वाराणसी के लक्सा की माधुरी पाठक की शादी दो दिसंबर 2007 को महमूरगंज की आदर्श नगर कॉलोनी के रजत मोहन पाठक के साथ हुई थी। आरोप था कि ससुराल वाले उसे व दोनों बच्चों को तीन अप्रैल 2013 को मारपीट कर घर से निकाल दिए। माधुरी ने पति के खिलाफ  भरण-पोषण और तलाक का अलग-अलग मुकदमा दर्ज कराया था।
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माधुरी ने खुद को बेरोजगार बताते हुए और पति को कई फर्मों का मालिक बताते हुए पांच लाख रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण और तलाक की मंजूरी देने की याचना की। इसके अलावा माधुरी ने पति, ससुर, सास और अन्य के खिलाफ घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न के आरोप में भी मुकदमा दर्ज कराया था।
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दोनों पक्षों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट में मीडिएशन भी हुआ जहां माधुरी ने 21 करोड़ की मांग की थी। पति रजत मोहन ने इस मामले में अपने अधिवक्ता संजय श्रीवास्तव के जरिये अदालत में आपत्ति दाखिल करते हुए कहा कि माधुरी एक फैशन डिजाइनर है और लाखों रुपये महीना कमाती है। बच्चों को उनसे व उनके परिवार से पत्नी मिलने नहीं दे रही है।

अदालत ने बच्चों को उनके पिता व दादा से मिलाने का आदेश पत्नी को दिया। बावजूद इसके पत्नी ने बच्चों को उनसे नहीं मिलाया। मुकदमों और बच्चों से न मिल पाने के दुख में रजत मोहन के पिता को सदमा लगा और उनकी मौत हो गई। रजत मोहन ने पत्नी के खिलाफ  हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की।


कोर्ट ने अवमानना का दोषी पाते हुए माधुरी को 50 हजार के अर्थदंड से दंडित किया। उधर, परिवार न्यायालय की न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान पत्नी को भरण-पोषण नहीं पाने का अधिकारी मानते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी।
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