कोरोना वायरस से लड़ने के उपाय बता रहे मनोवैज्ञानिक, घर पर रहकर करें ये काम
मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत। कहे कबीर हरि पाइये, मन ही के परतीत। कोरोना महामारी जीवन का अंत नहीं है। हम सभी के लिए बेहद सुखद समाचार है कि काशी में मिला पहला कोरोना का मरीज स्वस्थ होकर जल्द ही अपने घर को लौट गया।
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि निराशावाद मनुष्य की कार्यकुशलता व समस्या हल करने की शक्ति को छीन लेता है। समस्या कितनी भी गंभीर क्यों न हो यदि व्यक्ति अपने भय को समझकर उससे जीत जाता है तो आधी समस्या वहीं हल हो जाती है।
मनोविज्ञानी डॉ संतोष कुमार सिंह और मनोविज्ञानी डॉ नेहा आनंद।
मनोवैज्ञानिक डॉ नेहा आनंद का कहना है कि हर रोज सुबह उठकर आगर पूरे दिन की एक धारणा बना लें कि आज का दिन सफल व सुंदर होगा तो ऐसा ही होगा। यदि इस सोच के साथ हर रोज स्वयं सम्मोहन प्रक्रिया को बार-बार दोहराया जाए तो आपका आत्मविश्वास व मनोबल निश्चित रूप से दृढ़(मजबूत) होगा। विषम परिस्थिति में स्वयं पर विश्वास रखें और आशावादी बने रहें।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मनोवैज्ञानिक डॉ. संतोष कुमार सिंह का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा, एंग्जायटी, तनाव और चिड़चिड़ेपन की शिकायतें ज्यादा आ रही हैं। आर्थिक तनाव के कारण लोग ज्यादा दबाव महसूस कर रहे हैं।
क्या करें?
- लॉकडाउन में रहकर सोशल डिस्टेंसिग और हाइजीन के नियमों का पालन कर अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभानी है।
- दिनचर्या का एक शेड्यूल बनाएंगे तो आपका मन शांत रहेगा और मन में बेकार की बातें नहीं आएंगी। समस्या होने पर मनोवैज्ञानिक से परामर्श लें।
- दिनभर सोशल मीडिया और व्हॉटसऐप पर मैसेज भी नहीं पढ़ने चाहिए, क्योंकि इससे ज्यादा तनाव होता है। इसलिए कोशिश करें कि न्यूज और मैसेज देखने के लिए एक टाइम फिक्स कर लें।
- अपने आपको घर के सदस्यों के साथ व्यस्त रखें और घर में कुछ न कुछ खेल खेंलें, किताब पढ़ें। बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं।
- पूजा-पाठ में खुद को लगाएं और धार्मिक पुस्तकें व साहित्य जरूर पढ़ें।
- यह स्वमूल्यांकन का समय है और विश्लेषण करने की जरूरत है। विश्वास रखें कि यह बुरा समय है और जल्द ही छंट जाएगा।
- खुद को नियंत्रित करके जीवन यापन करें। डटकर मुकाबला करें। मन में अगर यह भाव होगा कि स्थिति भयानक है तो निराशा के शिकार होंगे।
- वर्तमान समय को चुनौती की तरह लें और डटकर इसका सामना करें। अवसाद को दूर भगाने का यह बेहतर तरीका है।
- इंडियन सायक्याट्री सोसायटी के एक सर्वे के मुताबिक मानसिक रोगों की शिकायतें लेकर आने वालों की संख्या में अचानक 20 फीसदी बढ़ोतरी हुई है।
- मनोविज्ञानियों के पास तनाव, एंग्जायटी और डर की शिकायतों वाले फोन सबसे अधिक आ रहे हैं।