कोरोना ने किया लाचारः भूखे पेट, टायलेट केबिन के पास बैठ सफर करने को हुए मजबूर, प्रवासियों से ट्रेनें फुल
जुर्माना देकर यात्रा करने को विवश महाराष्ट्र से लौटने वाले प्रवासी
सीट नहीं मिली तो गेट के पास फर्श पर चादर बिछाकर बैठ गए
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वाराणसी में कोरोना काल में प्रवासियों के घर लौटने की रफ्तार तेज हो गई है। यही वजह है कि महाराष्ट्र, सूरत, अहमदाबाद आदि प्रांतों से लौटने वाले प्रवासियों से ट्रेनें फुल होकर आ रही हैं। खास तौर पर बिहार व झारखंड जाने वाली ट्रेनों में तो बैठने के लिए सीट तक नहीं है। कोई फर्श पर तो कोई टायलेट केबिन में सफर कर रहा है।
रविवार को दोपहर लोकमान्य तिलक टर्मिनस से दरभंगा जाने वाली स्पेशल ट्रेन कैंट स्टेशन पर पहुंची तो यात्री पानी लेने के लिए पेयजल बूथ पर टूट पड़े। बिहार के बक्सर निवासी सुजीत कुमार मुंबई स्थित एक कंपनी में सुपरवाइजर का काम करते थे। कंपनी बंद हुई तो घर लौटना ही मुनासिब समझा। ट्रेन पकड़ने आया तो टिकट नहीं मिला। परिवार सहित चार लोग किसी तरह ट्रेन में सवार हो गए। टीटीई ने एक-एक यात्री का 2000 हजार रुपये जुर्माना वसूल किया। 8000 रुपये देकर आगे का सफर किया। सीट नहीं मिली तो गेट के पास फर्श पर चादर बिछाकर बैठ गए।
बिहार के औरंगाबाद के रहने वाले टैक्सी ड्राइवर श्याम ने बताया कि महाराष्ट्र में स्थिति बहुत भयावह है। लोग परेशान होकर पलायन कर रहे हैं। ट्रेन में जगह नहीं है। वेटिंग टिकट लेकर किसी तरह सवार हुए और टायलेट केबिन के पास 21 घंटे से अधिक समय हो गया सफर करते हुए।
स्टेशन पर नहीं हो रही साफ-सफाई व सैनिटाइजेशन
यात्रियों ने बताया कि रेलवे की ओर से किसी स्टेशन पर सैनिटाइजेशन, साफ-सफाई आदि का ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोकमान्य तिलक टर्मिनस से ट्रेन चली तो
कैंट स्टेशन पर ही साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन हुआ।
टिकट नहीं मिल तो टीटीई ने बहुत से यात्रियों से जुर्माना वसूला। भुसावल से चढ़ा तो 2000 रुपये लेकर किसी तरह दरभंगा अपने घर जा रहा हूं। रास्ते में खाने पीने की चीजें नहीं मिल रही हैं। बहुत कष्टकारी सफर है।-गफ्फार, यात्री, दरभंगा
ट्रेन के अंदर पानी गर्मी से खौल रहा है, पीने लायक नहीं है। जब किसी स्टेशन पर ट्रेन रुक रही है तो बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है। कोच के अंदर खाने पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। बच्चे दूध के लिए बिलख जा रहे हैं।-तबरेज, यात्री, दरभंगा