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हसरतों को पूरा कर भर दिया खाली वक्त
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वाराणसी। भाग दौड़ भरी जिंदगी में जहां लोगों को अपने लिए ही वक्त नहीं मिल पाता था तो भला अपने शौक को पूरा करने की हसरत एक सपने जैसी बनकर रह गई थी। लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते ही सही यह वक्त मिला। दरअसल, संक्रमण के खतरे को देखते हुए लागू हुए लॉकडाउन में जहां सब बंद हो गया। वहीं मानों मन के द्वारा खुल गए। अपनों शौक और सपनों को पूरा करने का स्वर्णिम समय भी मिल गया। इसका फायदा उठाते हुए कोई योग, ध्यान लगाकर अपनी सेहत को सुधारने में जुट गया तो कोई पेंटिंग के जरिए कल्पनाओं को नया आयाम देने लगा। वहीं कुछ लोग बागवानी और कविताओं के सृजन में जुट गए। कुछ ऐसे ही लोगों से हमने बात की जो लॉकडाउन में अपने मन की बगिया को संवार रहे हैं।
कोरोना पर लिख डाली कहानी, कविताएं
सेंट्रल जेल रोड निवासी अश्वनी शुक्ला को आम दिनों में कहानियां और कविताएं लिखने का वक्त नहीं मिल पाता था। लेकिन लॉकडाउन में वह घर पर हैं और खाली वक्त में उन्होंने कोरोना पर कई कविताएं और कहानी लिख डालीं। बताया कि कविताएं लिखने से उनका तनाव दूर हो जाता है और उनके अंदर पॉजिटिव एनर्जी आती है।
बेटे संग बना दिया पक्षियों का आशियाना
सुंदरपुर निवासी अजीत मेहरोत्रा व्यवसायी हैं। पहले काम के चलते परिवार के साथ वक्त नहीं मिलता था। लॉकडाउन ने परिवार की शिकायतें दूर कर दी हैं। अब रोज मैं और मेरा बेटा छत पर पौधों की देखभाल करते हैं। हम दोनों ने गर्मी में भूख प्यास से बेहाल पक्षियों के लिए आशियाना बनाया। रोज हम दोनों बागवानी करने के साथ पक्षियों को दाना पानी देते हैं।
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दीवारें बनीं कैनवास, उकेर दी कल्पनाएं
बीएचयू बीएफए की छात्रा कविता अमूमन अपने पैर के पंजों से चित्रों को आकार देती हैं। लेकिन लॉकडाउन में वो अपने हाथों के हुनर को दीवारों पर उकेर रही है। बचपन में पिता से प्रेरणा लेकर चित्रकला करने वाली कविता आजकल अपने घर की सूनी सपाट दीवारों में रंग भर रहीं हैं। कविता ने एक्रेलिक रंगों से दीवारों पर खूबसूरत आकृतियां बनाई है।
योग के जरिए बढ़ा रहीं फ्लैक्सिबिलिटी-
पांचवीं की छात्रा कोनिया निवासी प्रसिद्धि केसरी लॉकडाउन में नियमित योगाभ्यास के जरिए शरीर की फ्लैक्सिबिलिटी को बढ़ा रही हैं। प्रसिद्धि कहती हैं कि जब स्कूल जाती थी तो सिर्फ शाम को होमवर्क करने के बाद ही योगा का समय मिलता था। टीवी पर योग गुरु रामदेव द्वारा दिए गए चैलेंज को पूरा करने पर बहुत खुश हूं, और अब मुझे इसमें और रुचि बढ़ गई है।
सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है चित्रकला-
बीएचयू एमएफए के छात्र सोनू यादव ने बताया कि लॉकडाउन किसी अवसर से कम नहीं है। मैं अपनी कला को निखारने में जुटा हूं। मैंने चित्रों के जरिए कोरोना काल में उत्पन्न परिस्थितियों को बयां किया है। ऑयल पेंटिंग के जरिये मैंने कोरोना के प्रकोप, योद्धाओं का सम्मान व कोरोना के कारण लोगों की बदलती जीवनशैली को दिखाने का प्रयास किया है।
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कोरोना पर लिख डाली कहानी, कविताएं
सेंट्रल जेल रोड निवासी अश्वनी शुक्ला को आम दिनों में कहानियां और कविताएं लिखने का वक्त नहीं मिल पाता था। लेकिन लॉकडाउन में वह घर पर हैं और खाली वक्त में उन्होंने कोरोना पर कई कविताएं और कहानी लिख डालीं। बताया कि कविताएं लिखने से उनका तनाव दूर हो जाता है और उनके अंदर पॉजिटिव एनर्जी आती है।
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बेटे संग बना दिया पक्षियों का आशियाना
सुंदरपुर निवासी अजीत मेहरोत्रा व्यवसायी हैं। पहले काम के चलते परिवार के साथ वक्त नहीं मिलता था। लॉकडाउन ने परिवार की शिकायतें दूर कर दी हैं। अब रोज मैं और मेरा बेटा छत पर पौधों की देखभाल करते हैं। हम दोनों ने गर्मी में भूख प्यास से बेहाल पक्षियों के लिए आशियाना बनाया। रोज हम दोनों बागवानी करने के साथ पक्षियों को दाना पानी देते हैं।
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दीवारें बनीं कैनवास, उकेर दी कल्पनाएं
बीएचयू बीएफए की छात्रा कविता अमूमन अपने पैर के पंजों से चित्रों को आकार देती हैं। लेकिन लॉकडाउन में वो अपने हाथों के हुनर को दीवारों पर उकेर रही है। बचपन में पिता से प्रेरणा लेकर चित्रकला करने वाली कविता आजकल अपने घर की सूनी सपाट दीवारों में रंग भर रहीं हैं। कविता ने एक्रेलिक रंगों से दीवारों पर खूबसूरत आकृतियां बनाई है।
योग के जरिए बढ़ा रहीं फ्लैक्सिबिलिटी-
पांचवीं की छात्रा कोनिया निवासी प्रसिद्धि केसरी लॉकडाउन में नियमित योगाभ्यास के जरिए शरीर की फ्लैक्सिबिलिटी को बढ़ा रही हैं। प्रसिद्धि कहती हैं कि जब स्कूल जाती थी तो सिर्फ शाम को होमवर्क करने के बाद ही योगा का समय मिलता था। टीवी पर योग गुरु रामदेव द्वारा दिए गए चैलेंज को पूरा करने पर बहुत खुश हूं, और अब मुझे इसमें और रुचि बढ़ गई है।
सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है चित्रकला-
बीएचयू एमएफए के छात्र सोनू यादव ने बताया कि लॉकडाउन किसी अवसर से कम नहीं है। मैं अपनी कला को निखारने में जुटा हूं। मैंने चित्रों के जरिए कोरोना काल में उत्पन्न परिस्थितियों को बयां किया है। ऑयल पेंटिंग के जरिये मैंने कोरोना के प्रकोप, योद्धाओं का सम्मान व कोरोना के कारण लोगों की बदलती जीवनशैली को दिखाने का प्रयास किया है।