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कुंभाभिषेक पर विवादः बिना न्यास की अनुमति के ही करा दिया अनुष्ठान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 08 Jul 2018 12:20 PM IST
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कुंभाभिषेक अनुष्ठान
- फोटो : file photo
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के स्वर्णशिखर के कुंभाभिषेक पर नया विवाद शुरू हो गया। विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की अनुमति के बिना ही कुंभाभिषेक की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। इस प्रक्रिया के दौरान विश्वनाथ मंदिर के अधिनियम, प्रथा, परंपरा का उल्लंघन किया गया है।
मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष ने इसे अशास्त्रीय बताते हुए जांच की मांग की है। दक्षिण भारतीय मंदिरों में होने वाली कुंभाभिषेक की प्रक्रिया को विश्वनाथ मंदिर के इतिहास में पहली बार किया गया।
18 मई को काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की बैठक में भी इस पर चर्चा हुई थी। इस दौरान न्यास अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा था कि नर्मदा से सिंधु नदी तक यह प्रथा पूरे उत्तर भारत में लागू नहीं है। खासकर विश्वनाथ मंदिर में कभी भी ऐसा नहीं हुआ है।
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उन्होंने इस मामले में शृंगेरी मठ के शंकराचार्य से परामर्श लेने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके बिना न्यास की अनुमति के मंदिर परिसर में चार दिवसीय कुंभाभिषेक का आयोजन किया गया।
दक्षिण भारत के मंदिर शिखर पर देवी-देवताओं के अनेक विग्रह स्थापित होते हैं और उन विग्रहों की साफ-सफाई के लिए कुंभाभिषेक का आयोजन होता है। वहीं उत्तर भारत के मंदिरों में शिखर पर कोई विग्रह की स्थापना नहीं होती है।
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मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष ने इसे अशास्त्रीय बताते हुए जांच की मांग की है। दक्षिण भारतीय मंदिरों में होने वाली कुंभाभिषेक की प्रक्रिया को विश्वनाथ मंदिर के इतिहास में पहली बार किया गया।
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18 मई को काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की बैठक में भी इस पर चर्चा हुई थी। इस दौरान न्यास अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा था कि नर्मदा से सिंधु नदी तक यह प्रथा पूरे उत्तर भारत में लागू नहीं है। खासकर विश्वनाथ मंदिर में कभी भी ऐसा नहीं हुआ है।
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उन्होंने इस मामले में शृंगेरी मठ के शंकराचार्य से परामर्श लेने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके बिना न्यास की अनुमति के मंदिर परिसर में चार दिवसीय कुंभाभिषेक का आयोजन किया गया।
दक्षिण भारत के मंदिर शिखर पर देवी-देवताओं के अनेक विग्रह स्थापित होते हैं और उन विग्रहों की साफ-सफाई के लिए कुंभाभिषेक का आयोजन होता है। वहीं उत्तर भारत के मंदिरों में शिखर पर कोई विग्रह की स्थापना नहीं होती है।
धार्मिक भ्रम में रखकर कराया गया कुंभाभिषेक
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर
महारानी अहिल्याबाई ने जब मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था और महाराजा रणजीत सिंह ने स्वर्ण शिखर के लिए 26 मन सोना दान दिया था तो उस दौरान भी किसी तरह का कुंभाभिषेक नहीं हुआ था। यह पूरी तरह से मंदिर के अधिनियम और शास्त्र के विरुद्ध है।
काशी विश्वनाथ न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी का कहना है कि मंदिर के दानदाता सुबू सुंदरम ने स्थानीय अर्चकों और प्रशासन को धार्मिक भ्रम में रखकर कुंभाभिषेक कराया है। सभी को उसने अपने प्रभाव में लेकर मंदिर की परंपराओं से खिलवाड़ किया है। इस मामले में मुख्य कार्यपालक को निर्देश दिया गया है कि वह कुंभाभिषेक के शास्त्रीय प्रमाण को न्यास के समक्ष पेश करें और इस पर विद्वानों से चर्चा की जाएगी।
काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह का कहना है कि कुंभाभिषेक की प्रक्रिया के लिए शृंगेरी के शंकराचार्य का सहमति पत्र मिला था। उसके आधार पर ही यह आयोजन कराया गया है।
कमिश्नर दीपक अग्रवाल के अनुसार इस मामले में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है और अगर ऐसी कोई शिकायत मिलती है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
काशी विश्वनाथ न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी का कहना है कि मंदिर के दानदाता सुबू सुंदरम ने स्थानीय अर्चकों और प्रशासन को धार्मिक भ्रम में रखकर कुंभाभिषेक कराया है। सभी को उसने अपने प्रभाव में लेकर मंदिर की परंपराओं से खिलवाड़ किया है। इस मामले में मुख्य कार्यपालक को निर्देश दिया गया है कि वह कुंभाभिषेक के शास्त्रीय प्रमाण को न्यास के समक्ष पेश करें और इस पर विद्वानों से चर्चा की जाएगी।
काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह का कहना है कि कुंभाभिषेक की प्रक्रिया के लिए शृंगेरी के शंकराचार्य का सहमति पत्र मिला था। उसके आधार पर ही यह आयोजन कराया गया है।
कमिश्नर दीपक अग्रवाल के अनुसार इस मामले में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है और अगर ऐसी कोई शिकायत मिलती है तो इसकी जांच कराई जाएगी।