प्रियंका गांधी पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र आईं, और इस तरह साध गईं एक तीर से कई निशाने
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दुनिया को सामाजिक समरसता देने वाली रैदास और कबीर की धरा से कांग्रेस अपनी सियासत को धार देने में जुटी है। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध को हवा देने शुक्रवार को वाराणसी पहुंचीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की।
रविदास मंदिर से शुरू यात्रा का उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर पर समापन किया। पंचगंगा घाट स्थित श्री मठ (रामानंदाचार्य के आश्रम) की छत पर सीएए के विरोध में जेल गए लोगों से बात की। इसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदाय के लोग शामिल रहे।
सदियों पहले काशी में रामानंदाचार्य के आश्रम में अलग-अलग जातियों के 12 शिष्यों ने पूरी दुनिया को ऊंच-नीच और भेदभाव जैसी तमाम खाइयों को पाटने का संदेश दिया था। कांग्रेस की विरासत संजोने निकलीं प्रियंका भी रविदास और कबीर से सीधा रिश्ता जोड़कर हिंदुओं के साथ ही मुस्लिमों में भी पैठ बनाने की कोशिश में हैं। भाजपा को चुनौती देने के साथ ही वे अपनी जमीन मजबूत करने के लिए यह नया दांव चला है।
दरअसल, कांग्रेस अपने बिखरे वोट बैंक को संजोने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती। देशभर में सीएए पर हो रहे विरोध में एक समुदाय के लोग ही शामिल रहे, मगर वाराणसी में 19 दिसंबर को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के गेट से छात्रों ने विरोध मार्च किया था।
ऐसे में कांग्रेस इन छात्रों के जरिए इस विरोध को हवा देने की भी कोशिश करेगी। कांग्रेस का यह दांव कितना सफल होगा, यह तो भविष्य बताएगा। फिलहाल रविदास मंदिर, श्रीमठ और काशी विश्वनाथ मंदिर के जरिए हिंदू समाज में भी अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है।