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लोकसभा चुनाव 2019: खोया रसूख पाने के लिए हाथ-पैर मारेगी कांग्रेस, पिछले चुनावों में जब्त हुई जमानत

Mon, 01 Apr 2019 09:14 AM IST
Sayali Maurya पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी,अमर उजाला,वाराणसी
पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी,अमर उजाला,वाराणसी Published by: Sayali Maurya Updated Mon, 01 Apr 2019 09:14 AM IST
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Congress condition is complicated in purvanchal in loksabha eelection 2019
प्रतीकात्मक तस्वीर

लोकसभा चुनाव 2019 कांग्रेस के लिए बेदह अहम है। कांग्रेस वाराणसी, मिर्जापुर और आजमगढ़ मंडल में खोया सियासी रसूख पाने के लिए जूझ रही है। 2014 और 2009 के चुनाव में तीनों मंडल के 10 जिलों की 12 लोकसभा सीट में से कांग्रेस एक भी नहीं जीत सकी थी। 

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इस बार कांग्रेस ने पूर्वांचल की कमान प्रियंका गांधी वाड्रा को सौंपी है लेकिन वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सपा का गढ़ माने जाने वाले आजमगढ़ में सपा-बसपा गठबंधन से मुकाबले के लिए प्रत्याशी तक तय नहीं हुए हैं। इस वजह से कार्यकर्ता ऊहापोह में हैं और चुनाव प्रचार शुरू नहीं हो पा रहा है।
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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में राजीव गांधी के नेतृत्व में तीन मंडलों की सभी लोकसभा सीटों पर कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया था। इसके बाद बोफोर्स तोप सौदे में दलाली के आरोपों पर वीपी सिंह की मुहिम से कांग्रेस को खासा नुकसान पहुंचा। इसी बीच अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का भी अभियान शुरू हो गया था।
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दोनों देशव्यापी मुद्दों के बीच 1989 में नौवीं लोकसभा के लिए चुनाव में तीन मंडलों में वीपी सिंह की पहल पर गठित जनता दल ने छह, भाजपा ने तीन और कांग्रेस, बसपा और निर्दलीय प्रत्याशी ने एक-एक सीट जीती। इसके बाद 1991 में 10 जिलों से कांग्रेस के हिस्से में एकमात्र घोसी सीट आई।

1996, 1998 और 1999 में कांग्रेस खाता भी नहीं खोल सकी। 2004 में वाराणसी से डॉ. राजेश मिश्रा ने चुनाव जीत कर कांग्रेस का सियासी सूखा थोड़ा खत्म किया। बाद में 2009 और 2014 के आम चुनाव में 10 जिलों में कांग्रेस के ज्यादातर प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। 
 

कद्दावर प्रत्याशी भी नहीं आए सामने

Congress condition is complicated in purvanchal in loksabha eelection 2019

इस बार के चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन पहली बार चुनाव मैदान में है। आजमगढ़ से पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव गठबंधन के प्रत्याशी बनाए गए हैं। कहा जा रहा है कि वह पूर्वांचल में गठबंधन के प्रत्याशियों को मजबूती देंगे।

वहीं भाजपा-अपना दल (एस) गठबंधन की ओर से खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (वाराणसी), रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा (गाजीपुर), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल (मिर्जापुर) और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय (चंदौली) प्रत्याशी घोषित किए जा चुके हैं। भाजपा के पास पांच साल के विकास कार्यों का लेखाजोखा भी है।

दूसरी ओर, कांग्रेस ने पूर्वांचल में अभी तक कोई कद्दावर प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है। कांग्रेस ने मिर्जापुर और राबर्ट्सगंज से ही प्रत्याशी घोषित किया है। घोसी, जहां से 1989 और 1991 में भी कांग्रेस के कल्पनाथ राय जीते थे, वहां भी प्रत्याशी तय नहीं है।

गाजीपुर और चंदौली में वह बाबू सिंह कुशवाहा की जन अधिकार पार्टी के भरोसे है। वाराणसी से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर प्रियंका गांधी के नाम की अटकलें तो लग रही हैं लेकिन इस बारे में पार्टी स्पष्ट संकेत नहीं दे रही है। वैसे वाराणसी से कांग्रेस के टिकट के लिए केवल दो ही आवेदन किए गए हैं।

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